देवल संवाददाता, आजमगढ़। सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तरी छोर से होकर बहने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में पिछले तीन दिनों से मामूली कमी दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कई गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। जलस्तर घटने के साथ ही तटवर्ती इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों में दहशत है।
डिघिया गेज पर नदी के जलस्तर में 18 सेंटीमीटर और बदरहुआ गेज पर 20 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। डिघिया गेज पर नदी अभी भी खतरे के निशान से 48 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जबकि बदरहुआ गेज पर जलस्तर खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है।
जलस्तर घटने के साथ ही देवारा खास राजा के झगरहवा का पूरा में घाघरा ने कटान शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में करीब एक बीघा खेती योग्य भूमि नदी की धारा में समा चुकी है। सहबदिया और बरामदपुर में भी कटान का खतरा बढ़ गया है।
बाढ़ का पानी देवारा खास राजा-हाजीपुर, मानिकपुर-अभ्भनपट्टी और खरैलिया-सोनौरा संपर्क मार्ग से हट गया है, लेकिन इन रास्तों पर कीचड़ जमा होने के कारण आवागमन मुश्किल बना हुआ है। पैदल और बाइक से आने-जाने वाले लोग फिसलकर गिर रहे हैं।
बरामदपुर सबदिया, चक्की हाजीपुर, देवारा खास राजा के 28 मजरे सहित शाहडीह, भदौरा, बांका, बूढ़नपट्टी और सोनौरा समेत करीब दो दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। हालांकि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी अभी सामान्य नहीं हो सकी है।
मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से ग्रामीण परेशान
बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित गांवों में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में मच्छरों के कारण चैन की नींद तक नहीं मिल पा रही है। इंसानों के साथ पशु भी मच्छरों से परेशान हैं। इससे मच्छरजनित बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन के निर्देश के बावजूद अब तक प्रभावित गांवों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग शुरू नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी अपेक्षित पहल नहीं की गई। सर्दी, खांसी और वायरल बुखार से पीड़ित लोग परेशान हैं।
बेलहिया में नाव के सहारे आवागमन
बेलहिया गांव में आवागमन की समस्या सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ वर्ष पहले बाढ़ के दौरान बेलहिया संपर्क मार्ग पर बना पुल नदी की धारा में कटकर बह गया था। पुल का निर्माण दोबारा नहीं होने से ग्रामीणों को आज भी नाव के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि बेलहिया के रास्ते करीब दो दर्जन गांवों के लोग आवागमन करते हैं। पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को नाव के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई, किसानों के काम और अन्य दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से बेलहिया में पुल का दोबारा निर्माण कराने तथा बाढ़ प्रभावित गांवों में पर्याप्त नावों की व्यवस्था करने की मांग की है।
दस बाढ़ चौकियां तैनात
बाढ़ की स्थिति पर निगरानी के लिए क्षेत्र में 10 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इन चौकियों पर स्वास्थ्य, पंचायत और राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जलस्तर में कमी के साथ जल्द ही स्थिति सामान्य होगी, लेकिन कटान और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों ने बताया कि पानी कम होने के बाद भी परेशानी कम नहीं हुई है। नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से आने-जाने में काफी दिक्कत हो रही है। वहीं, मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने बेलहिया में पुल निर्माण और प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग व कीटनाशक दवा के छिड़काव की मांग की है।
