देवल संवाददाता, मऊ। जिलाधिकारी आनन्द वर्द्धन की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभागार में बाल श्रम उन्मूलन से संबंधित जनपद स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक संपन्न हुई। बैठक में जनपद में बाल श्रम की रोकथाम,बाल श्रमिकों के चिन्हांकन,उनके शैक्षिक एवं आर्थिक पुनर्वासन तथा संबंधित मामलों में प्रवर्तन एवं अभियोजन की कार्रवाई की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष बहुत कम बाल श्रमिकों का चिन्हांकन किया जा रहा है तथा खतरनाक श्रेणी में अभी तक एक भी बाल श्रमिक चिन्हित नहीं किया गया है, जो गंभीर विषय है। उन्होंने प्रवर्तन अधिकारी,मऊ को निर्देशित किया कि निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत बाल श्रमिकों का चिन्हांकन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही चिन्हित बच्चों का समयबद्ध तरीके से शैक्षिक एवं आर्थिक पुनर्वासन कराया जाए तथा संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार अभियोजन की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अगली बैठक में बाल श्रमिकों के चिन्हांकन,पुनर्वासन,अभियोजन एवं अन्य बिंदुओं पर दिए गए निर्देशों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे,बल्कि बाल श्रमिकों को कार्य से मुक्त कराने के साथ उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जाएं।जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि कार्यस्थलों से मुक्त कराए गए बच्चों को श्रम विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से लाभान्वित कराने का प्रयास किया जाए। साथ ही पात्रता के अनुसार अन्य विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं से भी उन्हें आच्छादित किया जाए, जिससे बच्चों एवं उनके परिवारों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से मजबूती मिल सके।उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कैम्प आयोजित कर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। कैम्प के माध्यम से श्रमिकों को श्रम विभाग की योजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने तथा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने इसी प्रकार मनरेगा श्रमिकों का कैम्प के माध्यम से पंजीकरण कराते हुए उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा।जिलाधिकारी ने कहा कि श्रमिकों को किसी प्रकार की समस्या न हो,इसके लिए संबंधित विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करें। बाल श्रम की रोकथाम के साथ-साथ श्रमिक परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए रोजगार एवं कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने दुकानों, अधिष्ठानों एवं औद्योगिक संस्थानों में नियमित रूप से निरीक्षण एवं छापेमारी कर बाल श्रम के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए,बल्कि कम उम्र के बच्चों के अभिभावकों एवं संबंधित प्रतिष्ठान संचालकों से वार्ता कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि 14 वर्ष से कम आयु के चिन्हित बाल श्रमिकों को तत्काल कार्यस्थल से हटाते हुए 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तथा बच्चे को कार्य से पूर्ण रूप से पृथक कराना सुनिश्चित किया जाए। बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत प्रत्येक बाल श्रमिक की तात्कालिक देखभाल एवं संरक्षण के लिए आवश्यक कार्रवाई तथा संरक्षण आश्रय की सुविधा महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी द्वारा सुनिश्चित की जाए।जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए संवेदनशीलता,गंभीरता एवं आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए शासन की मंशा के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें,ताकि जनपद में बाल श्रम की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा एवं बेहतर भविष्य का अवसर प्राप्त हों।बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रवे द्र कुमार,जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ स्वेता त्रिपाठी सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहें।
