देवल संवाददाता, मऊ। कानून व्यवस्था एवं अभियोजन शाखा की मासिक समीक्षा बैठक अपर जिलाधिकारी श्री प्रवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। बैठक में अभियोजन कार्यों, विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत दर्ज मुकदमों,जमानत प्रकरणों तथा कानून व्यवस्था से संबंधित मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई।अभियोजन शाखा की समीक्षा के दौरान संयुक्त निदेशक अभियोजन ने बताया कि जुलाई माह में अधीनस्थ न्यायालयों में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के कुल 133 वादों का निस्तारण किया गया। इनमें 37 मामलों में सजा, 13 में रिहाई, 48 में सुलह, 27 में सत्र सुपुर्द तथा 8 मामलों में दाखिल दफ्तर की कार्रवाई हुई। अन्य अधिनियमों के अंतर्गत कुल 294 वाद दायर हुए तथा 309 वादों का निस्तारण किया गया, जिनमें 307 मामलों में सजा तथा 2 मामलों में सत्र सुपुर्द की कार्रवाई हुई।सत्र न्यायालय में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कुल 39 वादों का निस्तारण हुआ, जिनमें 11 में सजा तथा 27 में रिहाई हुई। एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत 4 वादों का निस्तारण हुआ, जिनमें 2 मामलों में सजा हुई तथा 2 मामले मृत्यु के कारण बंद किए गए। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 5 मुकदमों का निस्तारण हुआ, जिसमें 1 में सजा तथा 3 में रिहाई हुई। रिहाई वाले 2 मामलों में अपील भी दायर की गई है। पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत 4 मुकदमों का निस्तारण हुआ, जिनमें 1 में सजा तथा 3 में रिहाई हुई।इस प्रकार अधीनस्थ एवं सत्र न्यायालयों में जुलाई माह में कुल 502 मुकदमों का निस्तारण हुआ, जिनमें 364 मामलों में सजा, 47 में रिहाई, 48 में सुलह, 29 में सत्र सुपुर्द तथा 14 मामलों में दाखिल दफ्तर की कार्रवाई की गई।जमानत प्रकरणों की समीक्षा में बताया गया कि कुल 596 जमानती प्रपत्र प्रस्तुत हुए, जिनमें 513 में जमानत स्वीकृत तथा 83 में जमानत अस्वीकृत की गई। अपर जिलाधिकारी ने अधिक संख्या में जमानत स्वीकृत होने पर अभियोजन पक्ष को मजबूत एवं प्रभावी पैरवी करते हुए अधिक से अधिक जमानत अपीलों को खारिज कराने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने समस्त अभियोजन अधिकारियों को सभी मुकदमों में मजबूत तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने को कहा, ताकि दोषियों को अधिक से अधिक सजा दिलाई जा सके।
कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान अपर जिलाधिकारी ने अवैध एवं जहरीली शराब तथा मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।कुछ थानों में जनवरी से जुलाई माह तक इस संबंध में अपेक्षित कार्रवाई न होने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित थाना प्रभारियों को कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए।महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की धीमी प्रगति पर उन्होंने समस्त क्षेत्राधिकारियों को नियमित समीक्षा करने तथा विवेचनाओं को शीघ्र पूर्ण कर समय से चार्जशीट दाखिल कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही महिला संबंधी अपराध,एससी/एसटी एक्ट,गैंगस्टर एक्ट,पॉक्सो एक्ट एवं गुंडा एक्ट की भी विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।एससी/एसटी एक्ट की समीक्षा के दौरान अपर जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि शासन द्वारा पीड़ितों को अनुमन्य मुआवजे की धनराशि यथाशीघ्र उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।गैंगस्टर एक्ट की समीक्षा में उन्होंने कुर्की की कार्रवाई के दौरान उसका व्यापक प्रचार-प्रसार कराने तथा गैंगस्टर एक्ट के मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई न करते हुए गुणात्मक एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।गुंडा एक्ट की समीक्षा के दौरान अपर जिलाधिकारी ने जिला बदर किए जाने वाले अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला बदर अपराधियों को नियमानुसार ढोल-नगाड़े के साथ जिले की सीमा से बाहर किए जाने की कार्रवाई करते हुए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी कराया जाए,जिससे अपराधियों में कानून का भय उत्पन्न हो और आमजन में सुरक्षा की भावना मजबूत हो।बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार,समस्त उप जिलाधिकारी,समस्त थाना प्रभारी एवं अभियोजन पक्ष के समस्त अधिकारी उपस्थित रहे।
