प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं से अपने पसंदीदा लोगों की आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरों के संघर्षों से सीख लेने का आह्वान किया। कहा- "रील के दौर" में इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर उन्हें कुछ खास रास्तों पर ले जा सकते हैं, पर शॉर्टकट आपको क्षति पहुंचा सकता है। इससे दूर रहें।
पीएम ने यह बात पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कोविन्द के जीवन को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए कहा, दृढ़ संकल्प किसी व्यक्ति को मुश्किलों से उबरने और सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकता है।
कहा, उन्होंने राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी आराम नहीं किया, बल्कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल पर काम कर रहे हैं। पीएम ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की, क्योंकि ये किसी खास दौर को उस व्यक्ति के जीवन के जरिए समझने का मौका देती हैं जिसने उसे खुद अनुभव किया हो। कहा,‘यह रील का जमाना है।
इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर अक्सर आपको अपनी ओर खींचते हैं। शार्टकट के इस दौर में, आइए रेलवे स्टेशनों पर अक्सर दिखने वाले उस संदेश को याद करें, शार्टकट आपकी जिंदगी छोटी कर सकता है।’
पीएम मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा ने इंटरनेट मीडिया पर ‘जेन-जी’ से जुड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। गत माह नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद मोदी ने अपने मंत्रियों से कहा था कि वे युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोविन्द को दृढ़ संकल्प की ‘जीवंत मिसाल’ बताया और भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उनकी सराहना की। कार्यक्रम में देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और कई केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित थे।
कोविन्द की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र की धरोहर: पीएम ने कहा, कोविन्द की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र की धरोहर’ बनेगी। नई पीढ़ी को इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
कहा, ‘हमें भविष्य में और ऐसे कई युवाओं की जरूरत है जो कोविन्द की तरह हों। ऐसे लोग जो हालात से हार न मानें, बल्कि हर चुनौती से पार पाने का इरादा रखें।’ बचपन में आग में अपनी मां को खोने की घटना ने उन्हें(कोविन्द को) और मजबूत बनाया। पिता ने उन्हें अच्छे संस्कार दिए।
पूर्व राष्ट्रपति बोले- मैंने अपने गांव के लोगों से दया और प्रेम का भाव सीखा
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा,मैं उप्र के कानपुर देहात जिले के एक गांव से आता हूं। मैंने ग्रामीणों से दया व प्रेम का भाव सीखा।’ कोविन्द ने सरकारी आवास योजनाओं के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को सिर पर छत मिलने का उल्लेख किया।
