गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी करते हुए इसे 1.33 लाख करोड़ रुपये घोषित किया है। यह भारी-भरकम राशि पाकिस्तान के कुल 6.38 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय बजट का लगभग 20.84 प्रतिशत हिस्सा है।
अपनी डगमगाती अर्थव्यवस्था के बावजूद सेना पर पानी की तरह पैसा बहाने की इस नीति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया है। विशेष रूप से अमेरिका ने इस भारी सैन्य आवंटन पर अपनी गहरी चिंता जताई है।
पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
अमेरिकी विदेश विभाग की फिस्कल ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट 2025 में पाकिस्तान के रक्षा खर्चों की निष्पक्षता और जवाबदेही पर कड़े सवाल खड़े किए गए हैं। इस रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि पाकिस्तान के सैन्य बजट पर न तो पर्याप्त संसदीय समीक्षा होती है और न ही किसी प्रकार की नागरिक निगरानी व्यवस्था उपलब्ध है।
अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह अपने सरकारी कर्ज, सार्वजनिक उपक्रमों की देनदारियों और रक्षा से जुड़े खर्चों की सटीक जानकारी समय पर सार्वजनिक करे।
चीन से हथियारों की अंधाधुंध खरीद
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के दौरान पाकिस्तान के रक्षा बजट में 41 प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष में हथियार, गोला-बारूद और नए सैन्य उपकरणों जैसे फिजिकल एसेट्स के लिए 31,480 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल से 40 फीसदी अधिक है।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के हथियार आयात में 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
चिंताजनक बात यह है कि आयात किए गए कुल हथियारों में से 80 प्रतिशत आपूर्ति अकेले चीन द्वारा की गई है, जिससे पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है।
मुस्लिम नाटो समझौते के तुरंत बाद अमेरिकी चेतावनी
अमेरिका की ओर से आई यह चेतावनी राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है। हाल ही में 7 अगस्त को मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच एक त्रिपक्षीय रणनीतिक समझौता हुआ, जिसे मुस्लिम नाटो के रूप में देखा जा रहा है।
इस समझौते में नाटो के अनुच्छेद-5 की तर्ज पर यह प्रावधान शामिल किया गया है कि किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते के ठीक पांच दिन बाद अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, जिसने पाकिस्तान के सैन्य इरादों पर निशाना साधा है।
वैश्विक पारदर्शिता जांच में भारत पास, पाकिस्तान फेल
अमेरिकी विदेश विभाग ने वित्तीय पारदर्शिता परखने के लिए दुनिया भर की 140 सरकारों और संस्थाओं का गहन मूल्यांकन किया था। इस जांच में भारत, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों ने तय मानकों को सफलता से पूरा किया और पास घोषित हुए।
वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान सहित 69 देश न्यूनतम मानकों पर भी खरे नहीं उतर सके। दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश और मालदीव के बजट में भी कई गंभीर अनियमितताएं और अपारदर्शिता पाई गई हैं।
बढ़ती गरीबी में सहायता रुकने का मंडराता खतरा
रक्षा बजट में इस अंधाधुंध बढ़ोतरी का सीधा असर पाकिस्तान की आम जनता पर पड़ रहा है। देश में गरीबी दर वर्ष 2018-19 के 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 28.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे अब 7 करोड़ से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी में जीने को मजबूर हैं।
हालांकि अमेरिका इस जांच में फेल होने वाले देशों पर सीधे आर्थिक या वीजा प्रतिबंध नहीं लगाता, लेकिन यदि अमेरिकी सहायता के गंभीर दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो वाशिंगटन किसी भी समय अपनी सीधी सरकारी आर्थिक मदद पर रोक लगा सकता है।
