समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा विघ्नहर्ता भगवान गणेश की वंदना तथा मंगलदीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीपशिखा के आलोक से प्रेक्षागृह का वातावरण आध्यात्मिक गरिमा एवं सृजनात्मक ऊर्जा से अनुप्राणित हो उठा।
कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति के रूप में प्रख्यात नाटककार जगदीशचंद्र माथुर की कालजयी रचना ‘रीढ़ की हड्डी’ का लघु नाट्य-रूपांतरण विद्यार्थियों द्वारा अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों के सशक्त अभिनय, संवाद-अभिव्यक्ति तथा मंच-संचालन ने सामाजिक विडंबनाओं और रूढ़ मानसिकताओं पर गंभीर प्रश्न उपस्थित करते हुए दर्शकों को विचारमग्न कर दिया। इसके पश्चात कक्षा XI के विद्यार्थियों ने ‘कटघरे में हिन्दी’ विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति, उसके सामाजिक -सांस्कृतिक महत्त्व तथा भाषायी अस्मिता से जुड़े प्रश्नों को अत्यंत प्रभावशाली एवं सारगर्भित शैली में उद्घाटित किया। इसी क्रम में विद्यार्थियों द्वारा अंग्रेज़ी कविता-वाचन की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भाषिक वैविध्य और साहित्यिक सौंदर्य का समावेश किया।
समारोह का विशेष आकर्षण कक्षा XII के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘महाभारत’ पर आधारित मूक नाटक रहा। बिना संवाद के केवल भाव-भंगिमा, अभिनय, मंच -संयोजन एवं सांकेतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से विद्यार्थियों ने महाभारत के व्यापक कथानक और उसके अंतर्निहित जीवन-दर्शन को जिस प्रभावोत्पादकता से प्रस्तुत किया, उसने दर्शकों को अभिभूत कर दिया। यह प्रस्तुति विद्यार्थियों की अभिनय-कुशलता एवं सामूहिक अनुशासन का अनुपम उदाहरण बनी।
कक्षा VIII के विद्यार्थियों ने अंग्रेज़ी भाषा में नाटक प्रस्तुत कर अपनी भाषिक दक्षता एवं अभिनय - प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘शब्दावली परेड’ ने पूरे समारोह में बाल-सुलभ उल्लास, कौतूहल और जीवंतता का संचार कर दिया। नन्हे विद्यार्थियों की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों से भरपूर सराहना अर्जित की।
समारोह की गरिमा को विशिष्ट आयाम प्रदान करने हेतु मुख्य अतिथि प्रमन श्रीवास्तव (समाचार ब्यूरो चीफ,अमर उजाला) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ श्रीमती डाली अरोड़ा, श्री यश सोनकर (पीआरओ एनटीपीसी) तथा श्री विवेक श्रीवास्तव (मानव संसाधन प्रतिनिधि) की विशिष्ट उपस्थिति ने आयोजन की शोभा एवं प्रतिष्ठा में अभिवृद्धि की।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन अथवा अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतर्मन को स्पंदित करने, मानवीय संवेदनाओं को परिष्कृत करने तथा युवा पीढ़ी को विवेकशील एवं उत्तरदायी नागरिक बनाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ-साथ साहित्य,कला एवं संस्कृति से निरंतर जुड़े रहने का संदेश दिया।
समारोह के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सुमित अरोड़ा ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकगण एवं समस्त विद्यार्थियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “साहित्य संगम विद्यार्थियों की प्रतिभा के प्रकटीकरण का मंच भर नहीं, अपितु उनकी कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता, भाषिक प्रवीणता और सांस्कृतिक चेतना को परिष्कृत करने की एक सार्थक यात्रा है।” उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से योगदान देने वाले सभी सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट किया।
इस प्रकार ‘साहित्य संगम’ का समापन समारोह साहित्य, संस्कृति, रंगमंच और सृजनशीलता के अद्वितीय संगम का अविस्मरणीय आख्यान बनकर सम्पन्न हुआ, जिसने विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ उपस्थित जनसमुदाय के मन-मस्तिष्क पर साहित्यिक चेतना की अमिट छाप अंकित की।
