विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच, भारत ने रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ नागरिक जहाजों की सुरक्षा, काला सागर के रास्ते अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने और ऊर्जा बुनियादी ढ़ांचे पर हमलों को रोकने के बारे में चर्चा की है।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत इस संघर्ष से जुड़े तीन अहम पहलुओं पर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। इनमें नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा, रूस और यूक्रेन से अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करना, और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत इन मुद्दों को सुलझाने के लिए संबंधित पक्षों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंनें कहा कि दूसरा मुद्दा यह है कि रूस और यूक्रेन, जो वैश्विक बाजारों के लिए अनाज के दो प्रमुख निर्यातक हैं, वहां से अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने का कोई तरीका निकाला जाए, क्योंकि काला सागर के रास्ते होने वाली यह आपूर्ति बहुत ज्यादा कम हो गई है।
जयशंकर ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने में आने वाली जटिलताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते के दायरे में क्या-क्या आना चाहिए, इसे लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी समझ है।
ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला न करने की बात शायद सबसे जटिल- जयशंकर
उन्होंने कहा कि तीसरा मुद्दा ऊर्जा से जुड़ा है। ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला न करने की बात शायद सबसे जटिल है, क्योंकि अलग-अलग पक्षों के लिए इसके अलग-अलग मायने हो सकते हैं। इसमें खुद ऊर्जा बुनियादी ढांचा शामिल है। किसी के लिए इसका मतलब रिफाइनरी हो सकता है, तो किसी के लिए ग्रिड। इसके अलावा, ईंधन ले जाने वाले जहाजों से जुड़े मुद्दे भी हो सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत इन मुद्दों पर, खासकर ऊर्जा बुनियादी ढांचे और ईंधन की ढुलाई की सुरक्षा को लेकर, सभी संबंधित पक्षों के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है।
वैश्विक व्यापार के लिए काला सागर का विशेष महत्व
वैश्विक व्यापार के लिए काला सागर के महत्व को देखते हुए, जयशंकर द्वारा उठाए गए ये मुद्दे मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे तक जाते हैं। व्यावसायिक जहाजरानी में किसी भी तरह की बाधा आने से जरूरी वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है, और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव पड़ सकता है।
इसी तरह, रिफाइनरियों, बिजली ग्रिडों और ईंधन ले जाने वाले जहाजों पर होने वाले हमले ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकते हैं और वैश्विक कीमतों को बढ़ा सकते हैं। कुल मिलाकर, समुद्री मार्गों, अनाज के निर्यात और ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, वैश्विक खाद्य और ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
