सकरा मार्ग को देखते हुए प्रशासन सतर्क, जगह-जगह कराया गया रूट डायवर्जन; महंगाई और कलाकारों की कमी से रामलीला का आयोजन प्रभावित
देवल संवाददाता, बूढ़नपुर (आजमगढ़)। आजमगढ़ जिले के नगर पंचायत बूढ़नपुर के कोयलसा बाजार में नवमी और दशमी के अवसर पर लगने वाले पारंपरिक मेले को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जंगी रोड, बैंक रोड, बहिरादेव रोड और बजरंग रोड चौक सहित बाजार के विभिन्न स्थानों पर मां दुर्गा की भव्य और दिव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन करते हैं और प्रसाद ग्रहण कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
कोयलसा का यह मेला कई वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बना हुआ है। मेले की तैयारियां कई महीने पहले से ही शुरू कर दी जाती हैं। नवरात्र के दौरान बाजार में भक्तिमय माहौल रहता है और मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
सकरे मार्ग के कारण प्रशासन सतर्क
कोयलसा बाजार में सड़कें सकरी होने और मेले के दौरान भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लोगों को जाम की समस्या से बचाने के लिए विभिन्न मार्गों पर रूट डायवर्जन की व्यवस्था की गई है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
कलाकारों की कमी और महंगाई से रामलीला पर संकट
स्थानीय लोगों के अनुसार, कोयलसा मेले में पहले रामलीला का आयोजन प्रमुख आकर्षण हुआ करता था। हर वर्ष रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी लीलाओं का मंचन किया जाता था, लेकिन अब कलाकारों की कमी और लगातार बढ़ती महंगाई के कारण रामलीला का आयोजन कराना कठिन होता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामलीला क्षेत्र की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा रही है। कलाकारों की उपलब्धता कम होने और आयोजन का खर्च बढ़ने से इस परंपरा को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इसके बावजूद कोयलसा बाजार का मेला आज भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवमी और दशमी के अवसर पर श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। मेले के माध्यम से जहां धार्मिक परंपराएं जीवंत रहती हैं, वहीं स्थानीय बाजार में भी रौनक देखने को मिलती है।


