गिरीश अकबरपुर दैनिक देवल अम्बेडकर नगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में ओपीडी का समय दोपहर 2 बजे से बढ़ाकर शाम 4 बजे तक करने का आदेश तो जारी किया गया, लेकिन अब इस व्यवस्था के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि कागजों में समय बढ़ाए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर अब भी पुरानी व्यवस्था ही लागू दिखाई दे रही है, जिससे लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है। बताया जा रहा है कि कई मरीज दोपहर बाद भी इलाज की उम्मीद में अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें ओपीडी बंद होने या सीमित सेवाएं मिलने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है। दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति और भी परेशानी भरी साबित हो रही है, क्योंकि वे लंबी दूरी तय कर अस्पताल पहुंचते हैं और फिर बिना इलाज के लौटने को मजबूर हो जाते हैं। मरीजों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने ओपीडी का समय बढ़ाने का निर्णय लिया है, तो उसे पूरी सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। केवल आदेश जारी करने से व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है, जब तक कि उसका पालन सुनिश्चित न हो। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता तथा कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि तय समय तक सेवाएं जारी रह सकें। वहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि ओपीडी का समय बढ़ाना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ, संसाधन और निगरानी तंत्र भी आवश्यक है। यदि इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो व्यवस्था केवल औपचारिक बनकर रह जाएगी। अब सवाल यह है कि क्या ओपीडी का बढ़ाया गया समय वास्तव में मरीजों को लाभ पहुंचा पा रहा है या फिर यह निर्णय केवल कागजों तक ही सीमित है। मरीजों और आमजन की नजर अब अस्पताल प्रशासन पर है कि वह इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है या नहीं।
अस्पताल में आदेश और हकीकत अलग, ओपीडी समय बढ़ा लेकिन सेवाएं पहले जैसी
सितंबर 02, 2026
0
Tags
