कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।भारतीय जनता पार्टी की नई जिला कार्यकारिणी सामने आने के बाद संगठन में बदलाव से ज्यादा सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जिलाध्यक्ष दिलीप देव पटेल की अगुवाई में घोषित इस टीम में जहां नए चेहरों को मौका मिला है, वहीं कई पुराने नाम बाहर हो गए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर हो रही है। संगठन के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि जिले में इस वर्ग की बड़ी आबादी होने के बावजूद कमेटी में कथित तौर पर सिर्फ एक ही प्रतिनिधि को जगह क्यों मिली। अंबेडकरनगर को अनुसूचित जाति बहुल जिलों में गिना जाता है और पांचों विधानसभा सीटों पर इस वर्ग का मतदाता निर्णायक भूमिका में माना जाता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, हर विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं की संख्या 50 हजार से अधिक है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिला संगठन में सीमित भागीदारी पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर रही है। कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि जिस समाज से चुनाव में व्यापक समर्थन लिया जाता है, उसे संगठनात्मक जिम्मेदारियों में भी समान रूप से स्थान मिलना चाहिए। इसी बीच, कुछ नियुक्तियों को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ नाम जमीनी सक्रियता के बजाय व्यक्तिगत प्रभाव और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर आगे बढ़े हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2027 का विधानसभा चुनाव है। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक संतुलन का संदेश भी जमीन तक पहुंचाना होगा। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या आने वाले समय में मंडल और बूथ स्तर पर अनुसूचित जाति वर्ग की भागीदारी बढ़ाई जाती है या मौजूदा ढांचे के साथ ही चुनावी रणनीति आगे बढ़ाई जाएगी। फिलहाल, नई जिला कार्यकारिणी को लेकर उठे ये सवाल जिले की राजनीति में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गए हैं और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने के संकेत हैं।
