बालूशाही, चाट, खजला एवं लाल गन्ने की गोटी को योजना में किया गया है शामिल
कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग एवं खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) योजना के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जनपद में चिन्हित पारंपरिक एवं स्थानीय व्यंजनों के समग्र विकास, उत्पादन को बढ़ावा देने, उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तथा इनके विपणन एवं ब्रांडिंग को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यशाला में उपायुक्त उद्योग द्वारा बताया गया कि एक जनपद एक व्यंजन (ODОC) योजना के अंतर्गत जनपद अम्बेडकरनगर के लिए बालूशाही, चाट, खजला एवं लाल गन्ने की गोटी को चिन्हित किया गया है। योजना के तहत उत्पादन, सेवा एवं व्यापार श्रेणी के पात्र उद्यमियों/इकाइयों को नियमानुसार वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
*वित्तीय सहायता का प्राविधान—*
25 लाख रुपये तक की कुल परियोजना लागत पर अधिकतम 25 प्रतिशत अनुदान देय होगा।
25 लाख रुपये से अधिक एवं 50 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर अधिकतम 20 प्रतिशत अनुदान देय होगा।
50 लाख रुपये से अधिक एवं 5 करोड़ रुपये तक की परियोजना लागत वाली इकाइयों को 10 प्रतिशत अथवा 50 लाख रुपये, जो भी कम हो, अनुदान के रूप में दिए जाने का प्राविधान है।
इसके अतिरिक्त योजना के अंतर्गत उद्यमियों को उत्पादों के विपणन एवं प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश में आयोजित स्थानीय मेलों, राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों तथा प्रदेश के बाहर एवं विदेशों में आयोजित व्यापार मेलों में नियमानुसार अनुदान/विपणन सहायता उपलब्ध कराने का प्राविधान किया गया है।
कार्यशाला में एक्सपर्ट विजय सिंह द्वारा उद्यमियों को पैकेजिंग, GMP, GHP, पंजीकरण प्रक्रिया एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता एवं सुरक्षित पैकेजिंग के साथ-साथ आवश्यक पंजीकरण एवं मानकों के अनुपालन के महत्व पर प्रकाश डाला।
जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने उद्यमियों को एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) योजना की तर्ज पर संचालित एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) योजना की विशेषताओं एवं प्राविधानों की जानकारी देते हुए पात्र उद्यमियों से योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यंजनों को प्रोत्साहन मिलने से न केवल पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी न्यायिक एवं सहायक आयुक्त खाद्य सहित संबंधित अधिकारी एवं उद्यमी उपस्थित रहे।
