देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। ग्राम खेबंधा में खनन पट्टे से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट / सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सोनभद्र की अदालत ने थाना जुगैल पुलिस को मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का आदेश दिया है। यह आदेश प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र संख्या 681/2026, चन्दन दूबे बनाम सचिन अग्रवाल आदि में 12 अगस्त 2026 को पारित किया गया।
आवेदक की ओर से अधिवक्ता ब्रज भूषण तिवारी ने धारा 173 (4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। आरोप है कि ग्राम खेबंधा, थाना जुगैल, तहसील ओबरा स्थित आराजी संख्या 246, खंड-स, रकबा सात हेक्टेयर क्षेत्र में बालू/मोरंग के लिए पांच वर्ष की अवधि का खनन पट्टा 9 जनवरी 2023 से 8 जनवरी 2028 तक स्वीकृत हुआ था। इसकी रजिस्ट्री 23 जनवरी 2023 को हुई थी।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि रजिस्ट्री के दौरान मेसर्स ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से सचिन अग्रवाल ने स्वयं को निदेशक बताते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और फोटो भी खिंचवाई, जबकि आरोप के अनुसार उन्होंने 14 नवंबर 2022 को ही निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। आवेदक ने इसे कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सरकारी अभिलेखों में स्वयं को निदेशक दर्शाने का गंभीर मामला बताया।
मामले में पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए आवेदक ने 6 जून 2026 को रजिस्टर्ड डाक से पुलिस अधीक्षक सोनभद्र सहित शासन एवं विभागीय अधिकारियों को भी शिकायत भेजी थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली गई।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेजों, खनन अधिकारी की आख्या तथा अन्य साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए कहा कि लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला प्रतीत होता है। अदालत ने माना कि आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और विवेचना के माध्यम से किया जाना आवश्यक है।
न्यायालय ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर विवेचना किया जाना आवश्यक है। अदालत ने आवेदक चन्दन दूबे का प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष जुगैल, सोनभद्र को आदेशित किया कि प्रार्थना पत्र में कथित तथ्यों के प्रकाश में अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना
सुनिश्चित करें। मामले में अब पुलिस की विवेचना के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होगी।
