आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। जाफराबाद नगर पंचायत के एमआरएफ सेंटर (कूड़ा डंपिंग सेंटर) को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर पंचायत क्षेत्र में संचालित इस सेंटर में कर्मचारियों की संख्या, कूड़ा डंपिंग और संचालन व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितताओं की चर्चा जोरों पर है। स्थानीय लोगों और मिली जानकारी के अनुसार यहां बड़े स्तर पर गड़बड़ी होने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि मछलीशहर की एक कंपनी द्वारा संचालित यह एमआरएफ सेंटर आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत ठेकेदार विपिन यादव की देखरेख में चल रहा है। जब सेंटर पर मौजूद सुपरवाइजर विपिन यादव से कर्मचारियों की संख्या को लेकर पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि सेंटर पर लगभग छह से आठ लोग कार्यरत हैं।
वहीं दूसरी तरफ जाफराबाद नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) विजय कुमार सिंह का बयान इससे बिल्कुल अलग नजर आया। ईओ का कहना है कि एमआरएफ सेंटर पर केवल तीन से चार लोग ही नियुक्त हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सेंटर पर काम करने वाले कर्मचारियों की वास्तविक संख्या क्या है?
सूत्रों की मानें तो एमआरएफ सेंटर पर 20 से 22 कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाले जाने की चर्चा है। यदि यह बात सही है तो आखिर बाकी कर्मचारी कहां हैं? क्या सिर्फ कागजों में कर्मचारियों की फौज दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है? यही सवाल अब नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत के ईओ और ठेकेदार विपिन यादव के बयानों में भारी विरोधाभास है। एक अधिकारी तीन-चार कर्मचारियों की बात कर रहा है, जबकि ठेकेदार छह से आठ लोगों के काम करने की जानकारी दे रहा है। ऐसे में आखिर सच कौन बोल रहा है? यह सवाल अब चर्चा का विषय बन चुका है।
जानकारी के अनुसार जाफराबाद नगर पंचायत में एमआरएफ सेंटर (कूड़ा डंपिंग सेंटर) का शिलान्यास वर्ष 2024 में किया गया था। ठेकेदार विपिन यादव का दावा है कि सेंटर पर प्रतिदिन दो गाड़ियों के बराबर कूड़ा डंपिंग की क्षमता है। लेकिन मौके से सामने आए वीडियो कई सवाल खड़े कर रहे हैं।
वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि काफी पुराना कूड़ा अब भी सेंटर पर जमा पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रोज दो गाड़ियों की डंपिंग हो रही होती तो दो वर्षों में करीब 1460 गाड़ियों के कूड़े का ढेर नजर आना चाहिए था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
इतना ही नहीं, वीडियो में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आरोप है कि एमआरएफ सेंटर में कूड़ा निस्तारण करने के बजाय कबूलपुर हाईवे किनारे कूड़ा डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास के लोगों को दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह पर्यावरणीय नियमों की खुली अनदेखी मानी जाएगी।
इस मामले में जब जाफराबाद नगर पंचायत के ईओ विजय कुमार सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बताया कि वह उस समय मछलीशहर नगर पंचायत में मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह सप्ताह में केवल मंगलवार और शुक्रवार को ही जाफराबाद नगर पंचायत कार्यालय में बैठते हैं।
हालांकि खबर लिखे जाने तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई थी, लेकिन पूरे मामले ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
