देवल, ब्यूरो चीफ,म्योरपुर (सोनभद्र)। एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन (आईवीडी) म्योरपुर द्वारा बुधवार को ग्राम काशीकुड़ (आरंगपानी) में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती एवं ग्राम उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय जैविक खेती जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को गोबर से वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) तैयार करने, गोमूत्र एवं कषैले पत्तों से प्राकृतिक कीट नियंत्रक बनाने तथा गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और शुद्ध मिट्टी से जीवामृत तैयार करने की विधि का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि जीवामृत के नियमित प्रयोग से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ती है, जिससे मृदा की उर्वरता और गुणवत्ता में सुधार होने के साथ फसलों का उत्पादन भी बढ़ता है। कार्यक्रम में जैविक खेती, जैव एवं वन्य संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा गौ-पालन के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और लोगों को स्वास्थ्यवर्धक एवं विषमुक्त खाद्यान्न प्राप्त होता है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि म्योरपुर संच के लगभग 30 गांवों में जैविक कृषि प्रशिक्षकों के माध्यम से किसानों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य जैविक कृषि को बढ़ावा देने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाना है। कार्यक्रम में पी-4 जोन के जोनल कोऑर्डिनेटर अशोक कुमार, किसान प्रशिक्षक श्यामसुंदर, मोबिलाइजर बुद्धिनारायण, किसान मित्र विजय कुमार, अमरेश कुमार, विभा जोसेफ, केवल प्रसाद सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और इसे अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।
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