कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।खरीफ की फसलों को उन्नत बेहतर लाभप्रद व टिकाऊ बनाने को लेकर जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों पर दो दिवसीय तकनीकी एवं आनफील्ड प्रशिक्षण का आयोजन अम्बेडकरनगर जनपद के विकासखंड कटेहरी के पांती में स्थित मां फूला देवी डिग्री कालेज में हुआ जहां पर 17 सामाजिक कार्यकर्ताओं व वालेण्टियर ने प्रतिभागिता किया।
पानी संस्थान अयोध्या व रोहिनी नीलेकनि फिलान्थ्राफिस फाउंडेशन के सहयोग से जन विकास केन्द्र भितरीडीह अम्बेडकरनगर द्वारा आयोजित प्रशिक्षण को सम्बोधित करती हुई सचिव गायत्री ने बताया कि किसानों को कम लागत में ज्यादा उत्पादन व पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना हमारा मुख्य उद्देश्य है। ताकि मिट्टी को जीवित रखकर धरती को बीमार होने से बचाया जा सके।
पानी संस्थान अयोध्या के परियोजना प्रबंधक अनूप ने सभी प्रतिभागियों की शैक्षणिक पारिवारिक एवं खेती करने की स्थिति का आंकलन किया व आधुनिक एवं फायदेमंद कृषि में उत्पादन व स्थिरता, लचीलापन, मृदा स्वास्थ्य, संसाधन संरक्षण, आय में वृद्धि, पर्यावरण सुरक्षा, पर आवश्यक टिप्स दिए। अनूप के निर्देशन में प्रशिक्षक सुखविंदर सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को बीज शोधन, पौधे की उम्र, खेत कीतैयारी, पौधे से पौधे की दूरी, रोपण विधि, खरपतवार प्रबंधन तकनीकी कृषि के छः सिद्धांत बताए। उन्होंने परंपरागत खेती श्री विधि खेती डी.एस.आर विधि की खेती का तुलनात्मक अध्ययन भी कराया जिससे पता चला कि श्री विधि खेती व डी.एस.आर विधि खेती में परंपरागत खेती से आधी लागत लगती है और दुगुना उत्पादन होता है।
प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने धान अरहर उड़द मक्का के साथ सब्जी की खेती, बीज की पहचान, मिट्टी की आवश्यकता, जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, देशी दवाओं का उपयोग, फसल सुरक्षा, भंडारण पर गहरी समझ विकसित किया।
चर्चा वार्ता गीत व फिल्म शो द्वारा प्रतिभागियों ने गुड़ गोबर बेसन गोमूत्र व जंगल की मिट्टी से जीवामृत बनाने मल्चिंग करने की प्रक्रिया लाइन विधि व बेडविधि से फसल उत्पादन व उसके संरक्षण एवं रखरखाव का तरीका सीखा।
मानवाधिकार रक्षक मनोज कुमार ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि पद्धति खेती का एक ऐसा तरीका है जो बदलते मौसम (सूखा, बाढ़) के बीच भी पैदावार को स्थिर रखता है, मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारता है और ग्रीनहाउस गैसों को कम करता है। इसके मुख्य तरीकों में फसल विविधीकरण, कृषि वानिकी, ड्रिप सिंचाई, और जीरो-टिलेज शामिल हैं। प्रशिक्षण के सत्रों का संचालन पानी संस्थान के हरिओम ने किया।
प्रशिक्षण को सफल बनाने में क्लाइमेट वैरियर लीड शकुंतला यादव क्लाइमेट वैरियर अनुपम यादव, दीपाली दूबे, आकांक्षा, कुसुम यादव, शकुंतला विश्वकर्मा के साथ कम्युनिटी मोबलाइजर छोटेलाल निरकला अंजली केसवर्कर अनुपम व वालेण्टियर निधि सिंह, श्रीकांत एवं विजेंद्र ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
