प्रेस की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप के आरोपों पर दो सप्ताह के भीतर मांगा गया जवाब
आमिर, देवल ब्यूरो ,महराजगंज ।जौनपुर पत्रकार को कथित रूप से धमकाने और प्रेस की स्वतंत्रता में बाधा पहुंचाने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए भारतीय प्रेस परिषद (प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया) ने जौनपुर के महाराजगंज थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार दूबे तथा तत्कालीन उपनिरीक्षक एस.पी. पाण्डेय को नोटिस जारी किया है। परिषद ने दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष लिखित रूप में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हिंदी दैनिक 'तेजस टूडे' से जुड़े पत्रकार पंकज कुमार ने भारतीय प्रेस परिषद में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि समाचार संकलन और पत्रकारिता गतिविधियों के दौरान उन्हें पुलिस अधिकारियों द्वारा धमकाया गया तथा उनके कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। शिकायत में इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला मामला बताया गया था।
प्रेस परिषद की सचिव शुभा गुप्ता द्वारा 5 जून 2026 को जारी नोटिस (केस संख्या 157/2024/बीपीसीआई) में कहा गया है कि शिकायत के प्रारंभिक परीक्षण के बाद परिषद के अध्यक्ष ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता के संभावित उल्लंघन से जुड़ा मामला माना है। इसी आधार पर दोनों पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नोटिस में प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 की धारा 13(1) एवं धारा 15(4) का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नोटिस प्राप्त होने की तिथि से 14 दिनों के भीतर अपना विस्तृत लिखित उत्तर तीन प्रतियों में परिषद के समक्ष प्रस्तुत करें। साथ ही उत्तर की एक प्रति शिकायतकर्ता पत्रकार को भी उपलब्ध कराई जाए।
परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाते हुए जांच समिति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद परिषद आवश्यकतानुसार उचित आदेश पारित कर सकती है।
इस कार्रवाई के बाद पत्रकार संगठनों और मीडिया जगत से जुड़े लोगों ने संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा अत्यंत आवश्यक है और पत्रकारों के अधिकारों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि परिषद की यह पहल पत्रकारों को निर्भीक होकर कार्य करने का वातावरण प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।
उधर, नोटिस जारी होने के बाद महाराजगंज क्षेत्र सहित पुलिस विभाग के विभिन्न स्तरों पर भी मामले की चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें संबंधित अधिकारियों के जवाब और प्रेस परिषद की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि भारतीय प्रेस परिषद समय-समय पर पत्रकारों की शिकायतों और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करती रही है। ऐसे मामलों में परिषद का हस्तक्षेप मीडिया की स्वतंत्रता और जवाबदेही दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
