देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। ओबरा क्षेत्र के रेणुका नदी में कथित रूप से नदी की धारा को बाधित कर अवैध बालू खनन किए जाने का मामला सामने आया है। इसको लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद ने आरोप लगाया कि खेवंधा क्षेत्र के समीप रेणुका नदी के बीचों-बीच रास्ता बनाकर पोकलेन मशीनों से बालू का खनन किया जा रहा है। उनका कहना है कि नदी की प्राकृतिक धारा को रोककर खनन करना पर्यावरणीय नियमों और खनन मानकों का खुला उल्लंघन है, जिससे नदी के अस्तित्व और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि नदी के भीतर किसी भी प्रकार का रास्ता बनाना तथा भारी मशीनों से खनन करना नियमों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बिना उचित चिन्हांकन के खनन किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि लगातार हो रहे खनन से नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंच रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तथा खनन संबंधी नियमों में नदी की धारा को बाधित न करने और नदी क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश हैं, तो फिर इनका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद ने मांग की कि अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए दोषी व्यक्तियों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पर्यावरण और नदी तंत्र को अपूरणीय क्षति हो सकती है। पर्यावरण कार्यकर्ता रामेश्वर प्रसाद, प्रदीप, बेचन, प्रशांत, दिनेश, दीपक और पंकज सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
.jpg)