देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (डब्ल्यूडीसी-2) के अंतर्गत भूमि संरक्षण इकाई चोपन की परियोजना कुड़वा में विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस के अवसर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों और ग्रामीणों को मरुस्थलीकरण की रोकथाम, जल संरक्षण तथा कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को बताया कि जल संसाधनों का संतुलित उपयोग, पर्यावरण संरक्षण तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर मरुस्थलीकरण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। किसानों को कम जल खपत वाली फसलों के चयन और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया, ताकि भविष्य में जल संकट की चुनौतियों का सामना किया जा सके। इस अवसर पर परियोजना क्षेत्र में नए विकास कार्यों का भूमि पूजन किया गया तथा पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण भी किया गया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक पौधरोपण किया और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि जल संरक्षण, पौधरोपण और भूमि संसाधनों के समुचित प्रबंधन से ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बढ़ते जल संकट और भूमि क्षरण की समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। कार्यक्रम में भूमि संरक्षण अधिकारी के.
के. सिंह, उदय कुमार गुप्ता, परियोजना प्रभारी विक्रम सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिकारियों ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
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