कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।अंबेडकरनगर की राजनीति में एक बड़ा संदेश छिपा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार वह फैसला कर लिया जिसकी चर्चा लंबे समय से पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में चल रही थी। जिले के प्रभारी मंत्री रहे गिरीश चंद्र यादव को हटाकर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर को नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
सवाल यह है कि आखिर भाजपा नेतृत्व को यह बदलाव क्यों करना पड़ा?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो गिरीश चंद्र यादव का कार्यकाल अंबेडकरनगर में भाजपा के लिए कोई बड़ी राजनीतिक उपलब्धि नहीं छोड़ पाया। जिले में संगठन के विस्तार, नए सामाजिक वर्गों को जोड़ने और भाजपा के जनाधार को मजबूत करने की जो अपेक्षाएं थीं, वे धरातल पर दिखाई नहीं दीं। पार्टी के भीतर भी यह चर्चा आम रही कि प्रभारी मंत्री के रूप में उनकी सक्रियता उतनी प्रभावी नहीं रही, जितनी एक चुनावी जिले में होनी चाहिए थी। आरोप यह भी लगते रहे कि उनका झुकाव अपने गृह जनपद और करीबी अधिकारियों की ओर अधिक दिखाई देता था, जबकि अंबेडकरनगर में भाजपा कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस करते रहे। नतीजा यह रहा कि भाजपा को जिले में वह राजनीतिक बढ़त नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी।*
ऐसे समय में जब 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनता जा रहा है, पार्टी नेतृत्व ने एक ऐसा चेहरा मैदान में उतारा है जो पूर्वांचल की राजनीति में अति पिछड़े वर्ग की मजबूत आवाज माना जाता है—ओम प्रकाश राजभर।
राजभर केवल एक मंत्री नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों को साधने वाले ऐसे नेता हैं जिनकी पकड़ गांव-गांव तक मानी जाती है। भाजपा अच्छी तरह जानती है कि अंबेडकरनगर में चुनाव केवल विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि सामाजिक और जातीय समीकरणों पर भी लड़ा जाता है। यही वजह है कि पार्टी ने एक ऐसे नेता को जिम्मेदारी दी है जो सीधे अति पिछड़े वर्ग के बीच प्रभाव रखता है। ओम प्रकाश राजभर की नियुक्ति को भाजपा के "मिशन 2027" का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। पार्टी का संदेश साफ है—अब केवल सरकारी योजनाओं की समीक्षा नहीं होगी, बल्कि राजनीतिक जमीन को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। अंबेडकरनगर में दलित, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग चुनावी जीत की कुंजी माना जाता है। भाजपा को उम्मीद है कि राजभर की मौजूदगी से इन वर्गों में पार्टी की पैठ और मजबूत होगी तथा विपक्ष के परंपरागत वोट बैंक में भी सेंध लगाई जा सकेगी। गिरीश चंद्र यादव के कार्यकाल को लेकर उठे सवालों के बीच भाजपा का यह फैसला कहीं न कहीं यह संकेत भी देता है कि पार्टी अब केवल औपचारिक प्रभारी मंत्रियों के भरोसे नहीं रहने वाली। उसे ऐसे चेहरे चाहिए जो चुनावी जमीन पर परिणाम दे सकें।अब निगाहें ओम प्रकाश राजभर पर हैं। क्या वे अंबेडकरनगर में भाजपा को नई राजनीतिक ऊर्जा दे पाएंगे? क्या वे अति पिछड़े वर्ग को भाजपा के पक्ष में मजबूती से खड़ा कर पाएंगे? और क्या उनका आगमन जिले की राजनीतिक तस्वीर बदल देगा?इन सवालों के जवाब आने वाला समय देगा, लेकिन इतना तय है कि भाजपा ने अंबेडकरनगर में बड़ा दांव खेल दिया है। पार्टी ने संदेश दे दिया है कि 2027 की लड़ाई के लिए अब मैदान में वही रहेगा जो परिणाम देने की क्षमता रखता हो।
