आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। जजेज कॉलोनी में आयोजित भव्य समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार जयंत्री प्रसाद जगमग के नवीन काव्य संग्रह “जगमग छंद” का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने उनकी रचनाओं को लोकजीवन, गांव और प्रकृति से जुड़ी संवेदनाओं का जीवंत चित्रण बताते हुए सराहना की।
समारोह के मुख्य अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय नागरी लिपि परिषद के अध्यक्ष डॉ ब्रजेश कुमार यदुवंशी ने कहा कि जयंत्री प्रसाद जगमग की रचनाएं सीधे आम जनमानस की भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। उनकी कविताओं और छंदों में गांव की मिट्टी की सोंधी महक, प्रकृति का सौंदर्य तथा ग्रामीण जीवन की सहजता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जगमग की रचनाओं में गांव के तालाब, चौपाल, खेत और बगीचे हमेशा जीवंत बने रहते हैं, जो पाठकों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय गीतकार गिरीश कुमार श्रीवास्तव गिरीश ने कहा कि जयंत्री प्रसाद जगमग लोकभाषा के सशक्त कवि और लोकजीवन के कुशल चितेरे हैं। उनकी रचनाएं केवल साहित्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देशभर के विभिन्न लोक कलाकारों द्वारा मंचों पर प्रस्तुत की जाती हैं। उन्होंने कहा कि जगमग का साहित्य समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है।
वरिष्ठ साहित्यकार के आर के सनेही ने कहा कि जयंत्री प्रसाद जगमग की रचनाएं युवाओं को प्रेरणा प्रदान करती हैं। उनके मार्गदर्शन और सानिध्य में कई युवाओं ने साहित्य और कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार जयंत्री प्रसाद जगमग ने उपस्थित अतिथियों और साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहता है कि साहित्य के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाने में योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और सकारात्मक सोच विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में आरके सनेही, बेहोश जौनपुरी, हरिलाल यादव, दयाशंकर सिंह, श्रीकांत यादव पप्पू, प्रणविजय सिंह सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
