देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। जनपद के एआरटीओ कार्यालय में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, बाहरी दलालों की सक्रियता एवं सरकारी कार्यों में अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित प्रार्थना पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। समाजसेवी कमलेश पांडेय ने आरोप लगाया है कि एआरटीओ कार्यालय भ्रष्टाचार और दलाली का अड्डा बन चुका है, जहां बिना दलाल के आम नागरिकों का कार्य समय से होना मुश्किल हो गया है। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि कार्यालय परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बाहरी दलाल सक्रिय रहते हैं, जो ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन ट्रांसफर, फिटनेस, परमिट, टैक्स जमा कराने समेत विभिन्न सरकारी कार्यों के नाम पर जनता से अवैध वसूली करते हैं। आरोप है कि कुछ बाबुओं और बाहरी दलालों की मिलीभगत से सरकारी व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा आम लोगों का शोषण किया जा रहा है। कमलेश पाण्डेय ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पिछले तीन माह की सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे कार्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों और सरकारी कार्यों में उनके कथित हस्तक्षेप की सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही है, लेकिन सोनभद्र एआरटीओ कार्यालय में इसका खुला उल्लंघन देखने को मिल रहा है। प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सोनभद्र प्रदेश का महत्वपूर्ण जनपद है, जो चार राज्यों की सीमाओं से जुड़ा हुआ है तथा खनन, कोयला, बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। साथ ही धार्मिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, जहां मां ज्वालामुखी मंदिर, डाला वैष्णो मंदिर सहित कई प्रमुख आस्था केंद्र स्थित हैं। ऐसे महत्वपूर्ण जिले में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों से आम जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है। समाजसेवी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि एआरटीओ कार्यालय परिसर में सक्रिय बाहरी दलालों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा आम जनता के कार्यों को पारदर्शी एवं ऑनलाइन माध्यम से कराया जाए। साथ ही कार्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर नियंत्रण हेतु विशेष अभियान चलाने की भी मांग की गई है। उधर लगाए जा रहे आरोपों के लेकर एआरटीओ प्रशासन से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मौजूद नहीं मिले। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
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