देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज विकास खंड के मारकुंडी ग्राम पंचायत अंतर्गत टोला सात नंबर में लघु सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे सिंचाई कूप (पक्का कुआं) निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और किसानों ने आरोप लगाया है कि मानक के विपरीत आधा-अधूरा निर्माण कर सरकारी धन की खुली लूट-खसोट की गई है। मामले को लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल समेत जिला प्रशासन को शिकायत भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
मारकुंडी निवासी लघु कृषक अशोक कुमार पुत्र स्व. रूपलाल ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी को भेजे शिकायत पत्र में बताया कि लघु सिंचाई विभाग द्वारा उनके खेत क्षेत्र में सिंचाई कूप का निर्माण कराया जा रहा था, लेकिन ठेकेदार ने कार्य अधूरा छोड़ दिया। आरोप है कि कुएं की खुदाई नाले के भीतर जमीन की सतह से करीब 15 फीट नीचे कराई गई। विरोध करने पर विभागीय जेई और ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि कुएं की खुदाई 40 से 45 फीट तक कराकर पर्याप्त पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। पीड़ित किसान का आरोप है कि शुरुआती खुदाई के दौरान ही पत्थर निकल आने पर ठेकेदार ने मात्र 17-18 फीट तक ही अधूरी खुदाई कराकर पत्थर के ऊपर बोल्डर से दीवार खड़ी करानी शुरू कर दी। जब ग्रामीणों ने मानक के अनुरूप खुदाई कराने की मांग की तो ठेकेदार और जेई ने बाद में मशीन से गहराई और चौड़ाई बढ़ाने का भरोसा दिया, लेकिन करीब तीन माह से निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले की जानकारी कई बार विभागीय जेई और अधिशासी अभियंता को लिखित, मौखिक और दूरभाष के माध्यम से दी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिलता रहा। आरोप है कि संबंधित ठेकेदार शिकायत करने पर धमकी भी दे रहा है और खुलेआम कह रहा है कि जहां शिकायत करनी हो कर लो, कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि बरसात शुरू होने के बाद अधूरा निर्माण पूरी तरह बेकार हो जाएगा और किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिल पाएगा। वहीं विश्वस्त सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाया गया है कि अधूरे निर्माण के बावजूद कूप निर्माण की पूरी धनराशि का भुगतान कर दिया गया है। इलाके के किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराकर अधूरे कूप निर्माण को मानक के अनुरूप पूरा कराने तथा दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की मांग की है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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