देवल संवाददाता, मऊ। नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू योजना के अंतर्गत आज कलेक्ट्रेट परिसर से फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता प्रचार वाहन को जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।जिलाधिकारी ने कहा कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण एवं भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसानों को पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए तथा फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं उपयोगी प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जाए। यह प्रचार वाहन जनपद के समस्त विकास खंडों में भ्रमण कर किसानों एवं आमजनमानस को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करेगा। इसके माध्यम से पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता में कमी, पर्यावरण प्रदूषण तथा मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही पराली न जलाने के लाभ एवं फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के विभिन्न तरीकों के बारे में भी बताया जाएगा। प्रचार अभियान के दौरान किसानों को अवगत कराया जाएगा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के अंतर्गत खेतों में फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। इसके लिए निर्धारित प्रावधानों के अनुसार 02 एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर ₹5,000, 02 से 05 एकड़ तक के क्षेत्र में ₹10,000 तथा 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर ₹30,000 प्रति घटना आर्थिक दंड का प्रावधान है। अंत में किसानों से अपील की गई कि वे पर्यावरण संरक्षण एवं भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए खेतों में पराली न जलाएं। फसल अवशेषों को गौशालाओं में दान कर उसके बदले निःशुल्क कम्पोस्ट खाद प्राप्त करें तथा फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन कर स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त वातावरण बनाने में सहयोग करें।इस अवसर पर उप कृषि निदेशक,जिला कृषि अधिकारी मऊ सहित मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
