देवल, ब्यूरो चीफ,ओबरा, सोनभद्र। नगर पंचायत ओबरा में सरकारी धन से किए गए भुगतानों का विस्तृत विवरण प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग लखनऊ पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश केशरी ने नगर पंचायत ओबरा से 7 जनवरी 2026 से 25 मार्च 2026 के बीच किए गए सभी भुगतानों का पूरा विवरण मांगा है। इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने द्वितीय अपील दर्ज करते हुए सुनवाई की तारीख 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार राकेश केशरी ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत 5 मार्च 2026 को मूल सूचना आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में नगर पंचायत ओबरा जनपद सोनभद्र के निर्धारित अवधि के दौरान किए गए सभी भुगतानों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इसमें प्रत्येक भुगतान की तारीख, भुगतान की राशि भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति, फर्म अथवा एजेंसी का नाम तथा संबंधित कार्य या सेवा का विवरण मांगा गया है। इसका उद्देश्य नगर पंचायत में सार्वजनिक धन से किए गए खर्चों से संबंधित अभिलेखों की जानकारी प्राप्त करना है।राकेश केशरी द्वारा मांगी गई सूचना में विशेष रूप से यह जानने की मांग की गई है कि संबंधित अवधि के दौरान नगर पंचायत द्वारा किन-किन व्यक्तियों, फर्मों या एजेंसियों को भुगतान किया गया और प्रत्येक भुगतान किस कार्य अथवा सेवा के लिए किया गया। भुगतान की तारीख और राशि सहित विवरण उपलब्ध होने से संबंधित अवधि के सरकारी खर्चों की जानकारी सामने आ सकेगी। हालांकि, अभी उपलब्ध दस्तावेजों में इन भुगतानों की वास्तविक राशि, भुगतान प्राप्त करने वालों के नाम अथवा किसी अनियमितता का प्रमाण शामिल नहीं है।मामले में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग द्वारा 9 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया गया है। आयोग के अभिलेख में इस प्रकरण की केस संख्या S09/A/1284/2026 तथा पंजीकरण संख्या A-20260803166 दर्ज है। नोटिस में राकेश केशरी को अपीलकर्ता तथा नगर पंचायत ओबरा के जन सूचना अधिकारी को विपक्षी पक्ष के रूप में दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त प्रथम अपीलीय अधिकारी के रूप में अपर जिलाधिकारी सोनभद्र के कार्यालय का उल्लेख किया गया है।आयोग के नोटिस के अनुसार मामले की सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे सुनवाई कक्ष संख्या एस-9 में निर्धारित की गई है। नोटिस में संबंधित अधिकारियों से अपना लिखित कथन सुनवाई की निर्धारित तारीख से दो दिन पूर्व आयोग को ईमेल अथवा विभागीय पोर्टल के माध्यम से PDF प्रारूप में भेजने की अपेक्षा की गई है। साथ ही लिखित कथन की एक प्रति अपीलकर्ता को उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया गया है ताकि वह संबंधित जवाब का अध्ययन कर अपना पक्ष प्रस्तुत कर सके।सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सरकारी विभागों के अभिलेखों तक पहुंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। नगर पंचायतों में विकास कार्यों, निर्माण, सफाई व्यवस्था, सामग्री खरीद और नागरिक सुविधाओं से संबंधित खर्चों का विवरण सार्वजनिक धन के उपयोग को समझने में सहायक हो सकता है। ऐसे मामलों में भुगतान से संबंधित अभिलेख उपलब्ध होने पर नागरिक आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह समझ सकते हैं कि निर्धारित अवधि में किस मद में कितना खर्च किया गया और भुगतान किस कार्य के लिए हुआ।इस मामले में अब राज्य सूचना आयोग की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए जाने वाले लिखित कथन उपलब्ध सरकारी अभिलेख और दोनों पक्षों के तर्क आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होंगे। अपीलकर्ता को भी अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। आयोग के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मांगी गई सूचना के संबंध में क्या निर्देश जारी किए जाते हैं।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह मामला नगर पंचायत ओबरा के भुगतान संबंधी विवरण को प्राप्त करने के लिए दायर सूचना आवेदन और उसके बाद दर्ज द्वितीय अपील से संबंधित है। मामले में अंतिम निष्कर्ष आयोग के आदेश और संबंधित विभाग के अभिलेख सामने आने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
