कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।मंच संचालन केवल माइक थामकर बोलने का नाम नहीं, बल्कि शब्दों, संवाद, हास्य, शालीनता और आत्मविश्वास के माध्यम से किसी भी आयोजन को यादगार बनाने की कला है । इसी कला को सरल, सहज और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करने वाली पुस्तक 'सफल मंच संचालन' मंच संचालन सीखने के इच्छुक युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों, कवियों और मंच संचालकों के लिए एक उपयोगी कृति के रूप में सामने आई है । उत्कर्ष प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के लेखक डॉ० तारकेश्वर मिश्र 'जिज्ञासु' शिक्षक, कवि, मंच संचालक एवं मोटिवेशनल स्पीकर हैं । अपने दीर्घकालीन मंचीय अनुभव और संचालन की बारीकियों को उन्होंने पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है । पुस्तक में विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के वार्षिकोत्सव, खेलकूद प्रतियोगिताओं, उद्घाटन समारोहों, पुरस्कार वितरण कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों, सम्मान समारोहों, कवि सम्मेलनों, मुशायरों, सेमिनारों तथा विभिन्न सामाजिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों के मंच संचालन से संबंधित उपयोगी सामग्री प्रस्तुत की गई है । इस कृति की विशेषता यह है कि इसमें मंच संचालन को केवल सैद्धांतिक विषय न बनाकर व्यवहार में उपयोग किए जा सकने वाले उद्घाटन वक्तव्य, अतिथि स्वागत, परिचय, मंचीय शायरी, हास्यपूर्ण संवाद, कार्यक्रमों के बीच जोड़ने वाली पंक्तियाँ तथा धन्यवाद ज्ञापन जैसे विषयों को उपयोगी शैली में प्रस्तुत किया गया है । लेखक ने मंच संचालक के लिए भाषा की शालीनता, समय प्रबंधन, प्रभावशाली उच्चारण, दर्शकों से संवाद, परिस्थितियों के अनुरूप प्रस्तुति और मंच की गरिमा बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण पक्षों पर भी ध्यान केंद्रित किया है । डॉ० तारकेश्वर मिश्र 'जिज्ञासु' का मानना है कि मंच संचालन एक ऐसी कला है जिसे निरंतर अभ्यास, अध्ययन और अनुभव के माध्यम से निखारा जा सकता है । उनकी यह पुस्तक उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है जो मंच पर अपनी प्रभावशाली पहचान बनाना चाहते हैं और विभिन्न प्रकार के आयोजनों का आत्मविश्वास के साथ संचालन करना सीखना चाहते हैं । पुस्तक की सरल भाषा, व्यावहारिक दृष्टिकोण और विविध आयोजनों के अनुरूप सामग्री इसे मंच संचालन के क्षेत्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी संदर्भ पुस्तक बनाती है ।
