देवल संवाददाता, मऊ। जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष तथा भाजपा किसान नेता राकेश सिंह ने कहा कि जिले में दो दिनों से भारी बारिश- आंधी- पानी- तेज हवा से धान की फसलों की भारी क्षति हुई है और कच्चे मकान भी गिर गए हैं।धान की जो फसल पक गई है वह खेतों में गिर गई है और खेतों में पानी भर जाने से किसानों की भारी क्षति हुई है। जिन किसानों ने धान की कटाई कर दी है उसकी भी क्षति है। देर से पकने वाली नॉटी मंसूरी (यम टी यू 7029) धान का रेडा यानी बाली लिया है वह जमीन पर गिर गया है इससे उसके पैदावार पर 50% का प्रभाव पड़ेगा। एक बिगहा धान की फसल तैयार करने में जुताई से लेकर रोपाई-दवाई -सोहनी -पानी-मजदूरी को जोड़ा जाएगा तो ₹15000 प्रति बीगहा खर्च किसान की लागत लगता है जिन किसानों ने सरसों- मटर- मसूर-आलू बो दिया है। उन खेतों में पानी लगने से इसकी भी क्षति है। इन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि किसानों की भारी क्षति को देखते हुए खेतों में क्षति का सही सर्वे प्लांट टू प्लांट कराया जाए। गांव में किसानों के कच्चे मकान भी गिर गए हैं उसे पर भी ध्यान देकर सहायता की जरूरत है।उन्होंने बताया कि गत वर्ष भी मोनथा चक्रवात से भी किसानों की धान की फसलों की भारी छती हुई थी और खेतों में पानी महिनों रहने से किसान रवि की फसलों की भी बुवाई नहीं कर सका था। पिछले वर्ष की क्षति का सर्वे कागज में हुआ लेकिन ₹1 भी पीड़ित किसान को नहीं मिला,जबकि तत्कालीन अपर जिला अधिकारी सत्य प्रिय सिंह ने किसान दिवस में बताया था कि रतनपुरा ब्लाक के 297 किसानों की क्षति रिपोर्ट शासन को भेजी गई है और इनको सहायता मिलेगा।
