देवल संवाददाता, मऊ। मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण एवं स्वरोजगार योजना के अंतर्गत विकासखंड मुहम्मदाबाद गोहना के ग्राम सभा खालिसा में दो दिवसीय खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 30 प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित तकनीकी जानकारी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत प्रतिभागियों को प्रशिक्षण किट एवं प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में क्षेत्र पंचायत सदस्य कुसुम देवी द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र एवं किट वितरित किए गए। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में प्रशिक्षण का लाभ उठाकर स्वरोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित करने का आह्वान किया।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को खाद्य पदार्थों के संरक्षण,प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की विभिन्न तकनीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि फल, सब्जियों एवं अन्य खाद्य पदार्थों को वैज्ञानिक एवं स्वच्छ विधियों से प्रसंस्कृत कर उनकी गुणवत्ता बनाए रखते हुए लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यम स्थापित कर रोजगार एवं अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त किए जा सकते हैं।कार्यक्रम में डीआरपी बृजेश प्रसाद द्वारा खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों,स्वरोजगार की संभावनाओं तथा उद्यम स्थापना के लिए आवश्यक पहलुओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के उपरांत प्राप्त कौशल का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों में करने के लिए प्रेरित किया।प्रशिक्षण के दौरान श्रीमती अर्चना देवी एवं श्वेता साहनी द्वारा आचार,मुरब्बा,जैम,चटनी आदि विभिन्न खाद्य उत्पादों के निर्माण एवं संरक्षण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को करेले का अचार तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया तथा तैयार अचार का स्वाद कराकर उसकी गुणवत्ता,स्वाद एवं संरक्षण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।कार्यक्रम में प्रभारी फल संरक्षण केंद्र मऊ त्रिभुवन राम सहित अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विनय कुमार,मुलायम सिंह यादव,रानी राजभर,गीता देवी,कुसुम सहित बड़ी संख्या में लाभार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।यह प्रशिक्षण शिविर ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने,स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने,खाद्य पदार्थों के मूल्य संवर्धन तथा युवाओं एवं ग्रामीणों को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
