देवल संवाददाता, मऊ। श्री जनकल्याण रामजानकी रामलीला समिति इंदारा के मेला परिसर में पूर्णिमा के दिन मेला का आयोजन कर उत्साह और श्रद्धापूर्वक मनाया गया। लोगों ने बुराई के प्रतीक रावण के पुतले दहन के साथ सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लिया।
जैसे ही सत्य के प्रतीक भगवान राम ने अहंकारी रावण के पुतले पर अग्नि बाण चलाया वैसे ही रावण के पुतले आतिशबाजी के धूमधड़ाके के साथ धू-धू करके जल उठे। रावण के पुतले जब दहन किया गया तो मेला मैदान श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। आतिशबाजी और पटाखों की तेज आवाज के साथ रावण के पुतलों का दहन किया गया। रावण दहन का नजारा देखने सभी मेला मैदानों में अप्रत्याशित भीड़ उमड़ी। उमड़े जनसैलाब को देखकर पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
रावण के पुतले में आग लगते ही सिर धड़ हाथ पैर के अलग-अलग हिस्से धू-धू करके जलने लगे।
मेला परिसर में बच्चो की मस्ती
मेला मैदान में बच्चों ने खूब मस्ती की। बच्चों के लिए मेलों में झूले, ऊंट-हाथी की सवारी,खेल खिलौने,चाट पकौड़ी का भरपूर इंतजाम था। कुछ बच्चे झूलों पर व्यस्त रहे,तो कुछ सवारी करने में व्यस्त रहे। रविवार को दोपहर के बाद से ही लोग अपने बच्चों को मेला घूमाने पहुंचने लगे। लोगों ने बुराई के प्रतीक रावण के पुतले दहन के सेल्फी ली। मेला परिसर में बहुत दूर दूर से लेकर आए दुकानें मेला से लेकर इंदारा बाजार में दुकाने लगी हुई थी। रावण जलने के बाद देर रात में लोग अपने बच्चों को रामलीला की मस्ती कराने पहुंचे।बच्चे तीर-धनुष और गदा खरीदे।
मेला में बच्चों ने तीर धनुष और गदा जैसे खिलौने खरीदे। कुछ बच्चों ने अन्य खिलौने खरीदे। मझवारा से आए सुरेमन ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ टेडीबियर लेकर मेले में आया था, लेकिन तीन दिन का माल पहले ही दिन बिक गया। मऊ से आए कागज की तलवार व अन्य खिलौने लेकर यहां पहुंचे नागेन्द्र ने बताया कि मेरा सारा सामान बिक गया। इस दौरान समिति अध्यक्ष रवि कुमार गुप्ता,राघवेंद्र प्रताप सिंह,अरविंद सिंह,विजय बहादुर सिंह,सत्यानंद सिंह, दिव्यांक मिश्रा,अभिषेक सिंह बिक्की,पुनीत सिंह आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहें।
