कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, अंबेडकर नगर के प्रशासनिक भवन में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एमबीबीएस, पैरामेडिकल एवं बीएससी नर्सिंग के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस अवसर पर नुक्कड़ नाटक एवं रंगोली प्रतियोगिता के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद, तनाव, चिंता तथा आत्महत्या की रोकथाम के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “Lived Experiences: Heard Voices, Real Change” अर्थात “अनुभवों की आवाज़ सुनी जाए, वास्तविक बदलाव लाया जाए” पर आधारित रही। छात्र-छात्राओं ने अपने प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों के अनुभवों, भावनाओं एवं विचारों को गंभीरता से सुनना आवश्यक है। उनकी बातों को समझना, उन्हें सम्मान देना तथा समय पर उचित सहयोग उपलब्ध कराना ही वास्तविक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य ऐसी मानसिक कुशलता की अवस्था है, जिसमें व्यक्ति जीवन के तनावों का सामना कर सके, अपनी क्षमताओं को पहचान सके तथा पढ़ाई, कार्य और सामाजिक जीवन में प्रभावी योगदान दे सके। WHO के अनुसार वर्ष 2023 में विश्वभर में लगभग 32.2 करोड़ लोग अवसाद से प्रभावित थे। अवसाद व्यक्ति की सोच, भावनाओं, कार्यक्षमता एवं पारिवारिक-सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समय पर उपचार और जरूरतमंद व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने पर जोर दिया।
प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना, मानसिक रोगों से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना तथा जरूरतमंद व्यक्तियों तक उचित सहायता एवं उपचार पहुंचाने के महत्व को रेखांकित करना है। इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, मनोचिकित्सकों, काउंसलरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक एवं रंगोली के माध्यम से अपनी रचनात्मकता, सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का सराहनीय प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि मानसिक परेशानी होने पर चुप रहने के बजाय अपनी बात साझा करनी चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि किसी व्यक्ति की बात को धैर्यपूर्वक सुनना, उसे समझना और समाज की रूढ़िवादी विचारों को अनसुना करते हुए बिना किसी पूर्वाग्रह के सहयोग देना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सक, शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि परिवार, समाज एवं पूरे राष्ट्र के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समय पर उपचार, संवेदनशील व्यवहार और आपसी सहयोग से एक स्वस्थ, सकारात्मक एवं संवेदनशील समाज का निर्माण किया जा सकता है।
