आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। श्रावण मास के पावन अवसर पर रविवार को शहर के बड़े हनुमान जी मंदिर परिसर में पंडित बांके महाराज ज्योतिष संस्थान के तत्वावधान एवं आचार्य (डॉ.) रजनीकांत द्विवेदी के सानिध्य में 35035 पार्थिव शिवलिंग पूजन एवं महारुद्राभिषेक का भव्य आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रों के उच्चारण और नमक-चमक विधि से संपन्न इस धार्मिक अनुष्ठान में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक एवं विधि-विधान से पूजन किया। पूरे मंदिर परिसर में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
आचार्य (डॉ.) रजनीकांत द्विवेदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि पार्थिव शिवलिंग का पूजन कलियुग में अत्यंत फलदायी माना गया है। उन्होंने भगवान श्रीराम का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि लंका विजय से पूर्व प्रभु श्रीराम ने समुद्र तट पर बालू का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव का पूजन किया था, जिसके बाद उन्हें विजय का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
उन्होंने अभिषेक के धार्मिक महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि वर्षा की कामना के लिए जल, पुत्र प्राप्ति के लिए गाय का दूध, धन-समृद्धि के लिए गन्ने का रस, कल्याण के लिए घृत, पापों के नाश के लिए मधु तथा रोगों की शांति के लिए कुश मिश्रित जल से भगवान शिव का अभिषेक करने का विधान शास्त्रों में वर्णित है। उन्होंने कहा कि रुद्राभिषेक से न केवल पापों का क्षय होता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का भी आगमन होता है।
आचार्य द्विवेदी ने बताया कि विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पार्थिव शिवलिंग पूजन की अलग-अलग संख्याएं निर्धारित हैं। धन प्राप्ति के लिए 500, पुत्र प्राप्ति के लिए 1500, भय निवारण के लिए 200 तथा समस्त मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए 1000 पार्थिव शिवलिंगों के पूजन का विधान बताया गया है।
इस अवसर पर काशी, अयोध्या और प्रयागराज से आए वैदिक विद्वानों ने नमक-चमक विधि से महारुद्राभिषेक संपन्न कराया। अनुष्ठान के समापन पर महाआरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख यजमान के रूप में विवेक पाठक, शशांक सिंह 'रानू', नीरज उपाध्याय, जे.पी. सिंह, राजेश एवं अर्चना सिंह, संजय सिंह, रत्नेश सिंह, डॉ. आर.पी. गुप्ता, सीए संजय गुप्ता, सुनील सेठ, निकेश सेठ, विक्की सेठ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में शशांक सिंह 'रानू', पंडित निशाकांत द्विवेदी, पंडित रौनक शुक्ला, डॉ. गंगाधर शुक्ला, डॉ. दिव्येंदु मिश्र, पंडित प्रमोद मिश्र, पंडित अखिलेश पांडेय, पंडित प्रभाकर मिश्रा, पंडित शुभम मिश्रा, पंडित आनंद तिवारी समेत अनेक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। महंत राम रतन दास, मंदिर के पुजारियों, नगर के गणमान्य नागरिकों तथा हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बना दिया।
