देश की मशहूर अंजुमनों ने अली असगर की शहादत को किया याद
आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। नगर के बलुआ घाट मोहल्ला स्थित मकबूल मंजिल में गुरुवार की रात अंजुमन हुसैनियां की ऐतिहासिक तरही ऑल इंडिया शब्बेदारी का 83वां दौर शुरू हुआ जो शुक्रवार की सुबह खत्म हुआ। इसमें देश की मशहूर 5 अंजुमनों के अलावा शहर की प्रमुख अंजुमनों ने पूरी रात कर्बला के सबसे कमसिन शहीद जनाबे अली असगर की याद में अपने दर्द भरे नौहे पेश किया। अलविदाई मजलिस के बाद गहवारे अली असगर और अलम, ताबूत निकाला गया जिसकी जियारत के लिए हजारों लोग मौजूद रहे।
शब्बेदारी का आगाज तिलावते कलाम-ए-पाक से सै. अली हसनैन श्यान ने किया। पेशखानी साबिर आज़मी व ज़ेना जफराबादी ने पेश किये। सोजख्वानी बुलंदशहर से आये ज़ामिन रज़ा व उनके हमनवा ने पढ़ा। मजलिस को खेताब करते हुए मौलाना सैय्यद सज्जाद हुसैन बिहार ने कहा कि इमाम हुसैन के सबसे छोटे बेटे जनाब अली असगर जिनकी उम्र छह माह की थी। यजीदी फौजों ने उस वक्त कर्बला के मैदान में तीन भाल के भारी भरकम तीर से इमाम के हाथों में शहीद कर दिया। जब वे यजीदी फौजों से इस बच्चे के लिए दो कतरा पानी पिलाने के लिए मांग रहे थे। अली असगर 3 रोज के भूखे-प्यासा थे पर जालिमो को उनपर भी रहम नही आया।
इस दर्दनाक मंज़र को सुनकर लोग दहाड़े मारकर रोने लगे। इसके बाद नौहा मातम का सिलसिला मिसरा तरहे "...जबीने दीने हक़ पे असगरे बेशीर लिख देना..... व तबस्सुमें अली असगर का तर्जुमा ही नही" पर नौहा मातम शुरू हुआ। इस अवसर पर अंजुमने परवाने अज़ा शिकारपुर बुलंदशहर, अंजुमन मखदुमियाँ गाज़ीपुर,अंजुमन हैदरी सेथल बरेली, अंजुमन जाफ़रिया जाफराबाद जलालपुर अम्बेडकरनगर, अंजुमन हैदरिया मनियारपुर सुलतानपुर के अलावा शहर की प्रमुख अंजुमनों ने अपने दर्द भरे नौहे पढ़कर कर्बला के सबसे कमसिन शहीद अली असगर को अपना नजराने अकीदत पेश किया। अलविदाई मजलिस मौलाना सैय्यद रज़ा अली दायम नजफी ने पढ़ा जिसके बाद शबीहे ताबूत, अलम, झूला अली असगर निकाला गया। शब्बेदारी का संचालन अर्शी वास्तवी व डॉ शोहरत जौनपुरी ने संयुक्त रूप से किया। अन्त में आभार अध्यक्ष सकलैन हैदर खान, महासचिव मिर्ज़ा जमील व सै. तहसीन हैदर ने प्रकट किया।
फोटो :मक़बूल मंजिल में अंजुमन हुसैनिया की तरही शब्बेदारी में मकबूल मंजिल में नौहा व मातम करती हुई अंजुमन
