अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि उसने खर्ग द्वीप पर जमीनी हमला करने की कोशिश की, तो उसे इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह द्वीप ईरान का सबसे अहम रणनीतिक तेल केंद्र है, जहां से देश के कुल कच्चे तेल का लगभग 90% निर्यात होता है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि जमीनी हमले की स्थिति में उनके लोग अमेरिकी सैनिकों का स्वागत करने के लिए मिनट गिन रहे हैं। बघाई ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि अमेरिका की किसी भी आक्रामक सैन्य गतिविधि का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन क्षेत्रों में ऐसे अनगिनत लोग हैं जो बेसब्री से मेरिकी सैनिकों आने का इंतजार कर रहे हैं।
क्यों इतना अहम है खर्ग द्वीप?
बुशहर प्रांत के तट से 55 किलोमीटर दूर स्थित खर्ग द्वीप ईरान के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है। यहां के गहरे पानी वाले टर्मिनल अल्ट्रा-लार्ज क्रूड कैरियर को डॉक करने की सुविधा देते हैं, जिससे यह ईरानी तेल निर्यात का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन जाता है।
ईरान की यह चेतावनी वॉल स्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें खुलासा किया गया था कि वाशिंगटन, तेहरान के खिलाफ एक व्यापक आक्रामक सैन्य अभियान की समीक्षा कर रहा है।
कथित तौर पर अमेरिका के सैन्य विकल्पों में हवाई हमलों को तेज करने से लेकर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने वाले जमीनी अभियान तक शामिल हैं।
इन रणनीतिक योजनाओं में कथित तौर पर खर्ग द्वीप पर कब्जा करना और पिकेक्स माउंटेन कॉम्प्लेक्स पर सटीक हमले करना शामिल है। पिकेक्स माउंटेन एक भूमिगत सैन्य ढांचा है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है।
तेल छोड़कर सब कुछ पर हमला करो
फॉक्स न्यूज के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने लगातार अमेरिकी सैन्य आक्रामकता को बढ़ाने के संकेत दिए हैं। 14 जुलाई को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि अगर उचित लगा तो वह जमीनी अभियान शुरू करने पर विचार करेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि मित्र देशों की सेनाएं, सीधे अमेरिकी सैनिकों की भागीदारी के बिना भी खर्ग द्वीप जैसे रणनीतिक स्थानों को नियंत्रित कर सकती हैं।
ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा कि हमने खर्ग द्वीप पर दो बार, यहां तक कि तीन बार हमला किया। मैंने कहा था कि तेल छोड़कर सब कुछ पर हमला करो! जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अभी भी द्वीप को अपने नियंत्रण में लेने का इरादा रखते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि अगर हम उन्हें गहराई से और मजबूती से कमजोर कर देते हैं, तो मैं ऐसा जरूर करूंगा।
ईरान की जवाबी सैन्य किलेबंदी
ईरान ने संभावित अमेरिकी ज़मीनी हमले से निपटने के लिए दशकों तक तैयारी की है। ईरान की परमाणु वार्ता टीम को सलाह देने वाले ईरानी शिक्षाविद सैयद मोहम्मद मरांडी के अनुसार, देश के सैन्य हथियारों को विकेंद्रीकृत कर दिया गया है। लगातार अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए शस्त्रागार को जमीन के बहुत नीचे छिपा कर रखा गया है।
राजनीतिक विश्लेषक ग्लेन डायसन को दिए एक साक्षात्कार में मरांडी ने यह भी दावा किया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इस संघर्ष में एक नई मिसाइल भी उतारी है।
हाल के हफ्तों में ईरान ने खर्ग द्वीप की किलेबंदी तेज कर दी है। वहां अतिरिक्त सैन्य बलों और एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किया गया है, जिसमें कंधे से दागी जाने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं। खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि तेहरान ने द्वीप के चारों ओर और तटरेखा पर एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर बारूदी सुरंगें भी बिछाई हैं।
खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खर्ग द्वीप पर किसी भी ज़मीनी अभियान में भारी जोखिम है। नाटो के पूर्व सुप्रीम अलाइड कमांडर, रिटायर्ड एडमिरल जेम्स स्टावरिडिस ने कहा कि ईरानी चतुर और क्रूर हैं और अमेरिकी सेना को अधिकतम नुकसान पहुंचाने के लिए वे सब कुछ करेंगे।
उन्होंने आगाह किया कि ईरानी सेना ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से एम्फीबियस जहाजों यानी पानी और जमीन दोनों पर चलने वाले जंगी जहाज पर हमला कर सकती है। इसके अलावा मुख्य भूमि से द्वीप की नजदीकी इसे लगातार हमलों के प्रति संवेदनशील बनाती है।
वहीं, खाड़ी देशों ने निजी तौर पर ट्रंप प्रशासन से खर्ग द्वीप पर कब्जा करने के लिए अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर न उतारने का आग्रह किया है। क्षेत्रीय सरकारों को डर है कि एक ज़मीनी अभियान से भारी जनहानि हो सकती है, खाड़ी के बुनियादी ढांचे पर ईरानी जवाबी कार्रवाई शुरू हो सकती है और पूरे क्षेत्र में युद्ध और अधिक लंबा खिंच सकता है।
