नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया। कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत पहले से ही दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
अब इस नई योजना के माध्यम से देश के जल निकायों यानी जलाशयों की सतह का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाएगा। इस पहल से देश में स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को और अधिक गति मिलेगी और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
मोदी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा
केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। इस अवधि के लिए सरकार ने 3.15 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता 2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती रहेगी। फसल चक्र के अनुसार समय पर मिलने वाली इस मदद से किसान आसानी से बीज, खाद और कृषि सामग्री खरीद सकेंगे।
सरकार के इस फैसले से किसानों की महंगे कर्ज पर निर्भरता कम होगी और विशेषकर छोटे व सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होगी।
खेलो इंडिया योजना के लिए 29,000 करोड़ का भारी आवंटन
मंत्रिमंडल का एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला देश में खेल संस्कृति और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से संबंधित है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि खेलो इंडिया योजना को विस्तार देते हुए अगले पांच वर्षों के लिए 29,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
उन्होंने याद दिलाया कि पिछले एक दशक में खेलों को बढ़ावा देने के लिए लिए गए निर्णयों के कारण ही आज भारत ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में ढेरों पदक जीत रहा है।
इस भारी-भरकम बजट का मुख्य उद्देश्य आगामी ओलंपिक, पैरालंपिक और विशेष रूप से 2030 में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारतीय खिलाड़ियों की तैयारियों को विश्वस्तरीय बनाना है।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण विधेयक लोकसभा से पारित
संसद भवन में जहां एक तरफ कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक हुई, वहीं दूसरी ओर दोनों सदनों में विपक्ष का भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसद गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और उनके सदन में आने की मांग को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। इसी भारी शोरगुल के बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में यह कड़ा प्रावधान किया गया है कि यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक साल के बाद लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो इसका पंजीकरण केवल जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से ही किया जा सकेगा।
बिल पास होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा चाहती थी, जिसके लिए समय भी तय था, लेकिन विपक्ष ने रचनात्मक चर्चा से दूरी बनाए रखी।
समुद्र मंथन प्रोग्राम को मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट की ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज मंजूर किया गया अगला बड़ा प्रोग्राम समुद्र मंथन है। समुद्र मंथन भारत में तेल और गैस की खोज और उत्पादन का एक प्रोग्राम है। यह 84,000 करोड़ रुपये के बजट वाला एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोग्राम है। भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन यानी समुद्र का वह इलाका जिस पर भारत का संप्रभु अधिकार और विशेषाधिकार है।
वहां हाइड्रोकार्बन के बड़े भंडार मौजूद हैं, जिसमें तेल और प्राकृतिक गैस शामिल हैं। अगर इन संसाधनों की सही तरीके से खोज की जाए, तो भारत अपने घरेलू उत्पादन को काफी बढ़ा सकता है। इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए, खोज और उसके बाद उत्पादन, दोनों के लिए एक व्यापक प्रोग्राम तैयार किया गया है। इस प्रोग्राम का नाम समुद्र मंथन रखा गया है।
नाविकों की सुरक्षा पर सीसीएस की बैठक
इन विधायी और नीतिगत घटनाक्रमों से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की एक अहम बैठक भी आयोजित की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम एशिया की वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी परिस्थिति में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि भारतीय नाविकों के साथ होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या मौत के मुद्दे को भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरजोर तरीके से उठाएगी और नागरिकों को नुकसान पहुंचाने वाली ऐसी किसी भी घटना को भारत द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
