देवल संवाददाता, बूढ़नपुर। तहसील बार एसोसिएशन बूढ़नपुर के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिंह एवं मंत्री जगत नारायण तिवारी ने प्रेस वार्ता आयोजित कर तहसीलदार शैलेश यादव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा न्यायालय में वादकारियों का पक्ष सुने बिना एकपक्षीय आदेश पारित किए गए हैं, जिससे आम जनता एवं अधिवक्ता समाज के हितों को नुकसान पहुंच रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान बार पदाधिकारियों ने बताया कि तहसीलदार न्यायालय में बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण बिना समुचित सुनवाई के कर दिया गया। उनका आरोप है कि लगभग एक हजार से अधिक फाइलों का रातोंरात निस्तारण कर दिया गया, जबकि संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि जब इस संबंध में तहसीलदार से वार्ता कर मामले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने अधिवक्ताओं की बात सुनने से इनकार कर दिया और इसे शासन की मंशा के अनुरूप किया गया कार्य बताया। इस रवैये से अधिवक्ता समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले कई दशकों में ऐसा पहला अवसर है जब बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण बिना प्रभावी सुनवाई के किए जाने का आरोप सामने आया है। उन्होंने इसे वादकारियों और अधिवक्ताओं दोनों के हितों के विपरीत बताते हुए इसकी घोर निंदा की।
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने पर तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो बूढ़नपुर बार एसोसिएशन के अधिवक्ता धरना-प्रदर्शन एवं अन्य लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिए बाध्य होंगे।
वहीं, इस संबंध में पूछे जाने पर उपजिलाधिकारी अभयराज पाण्डेय ने बताया कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। यदि अधिवक्ताओं की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
तहसीलदार पर मनमाने ढंग से आदेश पारित करने का आरोप, अधिवक्ताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी
बूढ़नपुर। तहसील बार एसोसिएशन बूढ़नपुर के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिंह एवं मंत्री जगत नारायण तिवारी ने प्रेस वार्ता आयोजित कर तहसीलदार शैलेश यादव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा न्यायालय में वादकारियों का पक्ष सुने बिना एकपक्षीय आदेश पारित किए गए हैं, जिससे आम जनता एवं अधिवक्ता समाज के हितों को नुकसान पहुंच रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान बार पदाधिकारियों ने बताया कि तहसीलदार न्यायालय में बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण बिना समुचित सुनवाई के कर दिया गया। उनका आरोप है कि लगभग एक हजार से अधिक फाइलों का रातोंरात निस्तारण कर दिया गया, जबकि संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि जब इस संबंध में तहसीलदार से वार्ता कर मामले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने अधिवक्ताओं की बात सुनने से इनकार कर दिया और इसे शासन की मंशा के अनुरूप किया गया कार्य बताया। इस रवैये से अधिवक्ता समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले कई दशकों में ऐसा पहला अवसर है जब बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण बिना प्रभावी सुनवाई के किए जाने का आरोप सामने आया है। उन्होंने इसे वादकारियों और अधिवक्ताओं दोनों के हितों के विपरीत बताते हुए इसकी घोर निंदा की।
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने पर तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो बूढ़नपुर बार एसोसिएशन के अधिवक्ता धरना-प्रदर्शन एवं अन्य लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिए बाध्य होंगे।
वहीं, इस संबंध में पूछे जाने पर उपजिलाधिकारी अभयराज पाण्डेय ने बताया कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। यदि अधिवक्ताओं की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
