कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।अम्बेडकरनगर जिले के विकास खंड भियांव के ग्राम सभा भियांव से सामने आई एक मार्मिक घटना ने रिश्तों, सामाजिक जिम्मेदारियों और सरकारी व्यवस्था तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन पुत्रों की मां होने के बावजूद एक वृद्ध विधवा महिला आज अकेलेपन, गरीबी और उपेक्षा का जीवन जीने को मजबूर है। उसकी हालत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश और संवेदना दोनों देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों के अनुसार वृद्ध महिला का अन्त्योदय राशन कार्ड बना हुआ है और वह सरकारी पेंशन की सहायता से किसी तरह अपना जीवन यापन कर रही है। आरोप है कि उसे निर्धारित 35 किलोग्राम के स्थान पर मात्र 30 किलोग्राम राशन दिया जा रहा है। वहीं रहने के लिए उसके पास केवल एक जर्जर छप्पर है, जहां वह अकेले जीवन गुजार रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मां ने अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया, आज वही मां तीन-तीन बेटों के रहते हुए भी बेसहारा क्यों है? गांव में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं कि वृद्ध महिला को अपने ही परिवार से अपेक्षित सहारा नहीं मिल पा रहा है।
वायरल वीडियो में वृद्धा की दयनीय स्थिति देखकर लोग भावुक हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल की बातें करने वाले समाज में यदि एक मां इस तरह उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर है, तो यह चिंतन का विषय है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारी मानवता दिखाते हुए मामले का संज्ञान लें, वृद्धा की स्थिति की जांच कराएं तथा उसे आवास, खाद्यान्न और अन्य सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ दिलाएं। साथ ही राशन में कटौती के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
यह घटना एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को सामने लाती है कि विकास और कल्याणकारी योजनाओं के दावों के बीच समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोग आज भी सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
