आमिर, देवल ब्यूरो ,महराजगंज (जौनपुर)। स्थानीय क्षेत्र के गांधीनगर बाजार से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ऐतिहासिक प्रतिमा चोरी होने का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना को एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक प्रतिमा का पता नहीं लगा सकी है, जिससे क्षेत्रीय नागरिकों, समाजसेवियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गहरा रोष व्याप्त है। कांग्रेस ने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए प्रतिमा बरामद कर पुनः स्थापित करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, गांधीनगर बाजार के राजा बाजार मार्ग स्थित मीरापुर शिरोमणि ग्राम पंचायत में वर्ष 1985 में गांधी विचार मंच के तत्वावधान में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। उस समय मंच के अध्यक्ष चंद्र प्रताप सिंह थे। गांधी जयंती के अवसर पर तत्कालीन सामुदायिक ग्राम विकास एवं पंचायती राज मंत्री स्वर्गीय श्याम सूरत उपाध्याय ने प्रतिमा का अनावरण किया था। वर्षों से यह प्रतिमा क्षेत्र में गांधीवादी विचारधारा और सामाजिक चेतना का प्रतीक बनी हुई थी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, 5 मई की रात अज्ञात चोरों ने प्रतिमा को उसके चबूतरे से उखाड़कर चोरी कर लिया। चोरी के दौरान चबूतरे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। सुबह घटना की जानकारी होते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और लोगों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी।
गांधी विचार मंच के पूर्व अध्यक्ष चंद्र प्रताप सिंह के पुत्र बालेंदू प्रताप सिंह ने बताया कि घटना के संबंध में 7 मई को मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मौके का निरीक्षण भी किया, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद सिंह ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह केवल एक प्रतिमा की चोरी का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान और उनके विचारों से जुड़ी भावना पर आघात है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्रतिमा बरामद कर उसे पुनः स्थापित नहीं किया गया तो कांग्रेस कार्यकर्ता व्यापक धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
वहीं, महराजगंज थानाध्यक्ष तरुण श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। विभिन्न पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है और जल्द ही घटना के खुलासे का प्रयास किया जाएगा।
गांधी जी की प्रतिमा चोरी होने की इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि गांधी जी की प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि इलाके की पहचान और सामाजिक विरासत का हिस्सा थी। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
