गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पानी से जुड़ी तीन दशक पुरानी समस्या के समाधान के लिए हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किया। अमित शाह ने इसे प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए "संवाद से समाधान" का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे राजस्थान के सीकर, चूरू, झुंझुनू के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी व फतेहाबाद के इलाकों में पीने के पानी की व्यवस्था हो जाएगी।
समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (एनसीएम) पानी यमुना नहर से राजस्थान पहुंचाया जाएगा। इसके के लिए तीन भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जाएंगे, जिनका व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा। इससे अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बंटवारे के लिए 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही से इस्तेमाल सुनिश्चित हो सकेगा। इससे राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति हो सकेगी।
समझौता दोनों राज्यों के लिए जीत- अमित शाह
समझौते को दोनों राज्यों के लिए जीत का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए अमित शाह ने कहा कि इसमें वित्तीय जिम्मेदारी, लागत साझीकरण, जल आवंटन और जल छोड़ने के प्रोटोकाल व रखरखाव का बारीकी से ध्यान रखा गया है। उन्होंने कुछ दिनों में ही दोनों राज्यों को समझौते को राजी करने के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटील की तारीफ की।
राजस्थान में पीने के पानी समस्या के समाधान में मदद मिलेगी- अमित शाह
अमित शाह के अनुसार, समझौते से हरियाणा और विशेषकर राजस्थान में पीने के पानी समस्या के समाधान में मदद मिलेगी। जो पानी किसी काम नहीं आ रहा था, वह लोगों की प्यास बुझाने और बड़े तालाबों में संचयित होकर भूजल स्तर बढ़ाने का काम करेगा।
शाह ने कहा कि समझौते से साफ है कि यदि राज्य सहकारी संघवाद की सोच के साथ आगे बढ़ें तो तीन दशक पुरानी समस्या भी आसानी से सुलझ सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आने वाले कई दशकों तक विवादहीन समझौते के रूप में स्थापित होगा।
