कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।तहसील आलापुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सुभाष सिंह धामी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि एक ओर जहां कुछ मामलों में प्रशासन ने बेहद सख्ती दिखाते हुए त्वरित कार्रवाई की, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से लंबित शिकायतों और राजस्व अभिलेखों में दर्ज अतिक्रमणों पर आंखें मूंद ली गईं। इससे क्षेत्र में प्रशासन के दोहरे मापदंड को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
*सिपाह बाजार में दी गई थी सामूहिक कार्रवाई की दलील*
सिपाह बाजार में लोक निर्माण विभाग की भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि राम किशुन पुत्र बंशराज तथा श्रवण पुत्र राम किशुन द्वारा किए गए अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाया जाए।
बताया जाता है कि उस समय प्रशासन की ओर से यह तर्क दिया गया कि बाजार में 50 से अधिक लोगों ने अस्थायी अतिक्रमण कर रखा है। ऐसे में केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई करना अनुचित और भेदभावपूर्ण होगा। इसी आधार पर कार्रवाई टाल दी गई थी।
हालांकि बाद में प्रशासन ने जेसीबी चलवाकर सिपाह बाजार में व्यापक अभियान चलाया और दर्जनों लोगों के अस्थायी अतिक्रमण हटवा दिए। इससे यह सवाल उठने लगा कि जब कार्रवाई संभव थी तो शुरुआती शिकायतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
*धनुकारा में बदला कार्रवाई का पैमाना?*
आलोचकों का आरोप है कि धनुकारा गांव में प्रशासन की कार्यशैली बिल्कुल अलग नजर आई। यहां कथित रूप से राजस्व अभिलेखों में मार्ग दर्ज न होने के बावजूद रास्ते की चौड़ाई बढ़ाने की मुहिम चलाई गई और कार्रवाई का केंद्र केवल कुछ चुनिंदा परिवारों को बनाया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि विधवा सरिता पत्नी राममिलन तथा उनके परिजनों के अस्थायी अतिक्रमण को हटाने में प्रशासन ने विशेष रुचि दिखाई। विरोध के दौरान मुकदमे दर्ज हुए, गिरफ्तारी हुई और बाद में संबंधित लोगों को न्यायालय से जमानत प्राप्त करनी पड़ी।
*गाटा संख्या 399 और 432 पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?*
धनुकारा गांव की निवासी माया देवी का कहना है कि वह लंबे समय से नवीन परती भूमि की गाटा संख्या 399 और 432 पर कथित अतिक्रमण हटाने की मांग कर रही हैं। अनेक शिकायतों के बावजूद आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि प्रशासन अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चला रहा है तो फिर इन गाटों पर शिकायतों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा।
*चकमार्ग संख्या 407 का मामला भी लंबित*
इसी गांव के मनोज पुत्र जियालाल पिछले एक वर्ष से अधिक समय से राजस्व अभिलेखों में दर्ज चकमार्ग संख्या 407 से अतिक्रमण हटवाने की मांग कर रहे हैं। बताया जाता है कि उन्होंने कई शिकायती पत्र, जनसुनवाई प्रार्थना-पत्र और सूचना के अधिकार के माध्यम से भी मामला उठाया, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक कार्रवाई का इंतजार आज भी बना हुआ है।
*निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल*
क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि जहां कुछ मामलों में प्रशासन अत्यधिक सक्रिय दिखाई देता है, वहीं अन्य मामलों में शिकायतें वर्षों तक फाइलों में दबी रह जाती हैं। यही कारण है कि उपजिलाधिकारी आलापुर की कार्यप्रणाली को लेकर निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि शिकायतकर्ताओं के आरोप सही हैं तो यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और समान न्याय के सिद्धांत से भी जुड़ जाता है।
*प्रशासन से उठी मांग*
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सिपाह बाजार, धनुकारा, गाटा संख्या 399 एवं 432 तथा चकमार्ग संख्या 407 से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि अलग-अलग मामलों में कार्रवाई के मानदंड क्या रहे और किन आधारों पर निर्णय लिए गए।
अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इन आरोपों का संज्ञान लेते हैं या फिर क्षेत्र में उठ रहे दोहरे मापदंड के सवाल यूं ही हवा में तैरते रहेंगे।
