बांग्लादेश के विशेष अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने रविवार को ढाका के पूर्व पुलिस प्रमुख हबीबुर रहमान सहित तीन पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है। इन पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान बर्बरता और दो लोगों की हत्या का आरोप है।
इस आंदोलन के कारण ही तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन का पतन हुआ था। न्यायाधिकरण के अध्यक्ष मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार ने यह फैसला सुनाया।
इसके अतिरिक्त, एक सब-इंस्पेक्टर को उम्रकैद और एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर को 20 साल जेल की सजा सुनाई गई है। 'जुलाई विद्रोह' के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में लगभग 1,400 लोग मारे गए थे, जिसके बाद पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना जान बचाकर भारत चली आई थीं।
इस न्यायाधिकरण का गठन 2010 में शेख हसीना सरकार द्वारा 1971 के मुक्ति संग्राम के अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए किया गया था। वहीं, 30 जून को पूर्व सूचना मंत्री हसनुल हक इनु के खिलाफ भी न्यायाधिकरण अपना फैसला सुनाने वाला है।
इससे पहले, 17 नवंबर 2025 को इसी न्यायाधिकरण ने शेख हसीना और उनके गृह मंत्री असदुज्जमा खान कमाल को प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। उसी दिन पूर्व आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को सरकारी गवाह बनने पर पांच साल की जेल की सजा दी गई थी। बहरहाल, फरार दोषी आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी के बाद ही इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
