देवल, ब्यूरो चीफ,म्योरपुर, सोनभद्र। जनपद के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में दो वर्षीय सर्वेइंग कोर्स संचालित किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि जिले में इस कोर्स की सुविधा न होने के कारण उन्हें पढ़ाई के लिए अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए संभव नहीं हो पाता। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां के अधिकांश युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। ऐसे में सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाई करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है, जिससे वे इस महत्वपूर्ण कोर्स से वंचित रह जाते हैं। स्थानीय छात्रों ने बताया कि सोनभद्र खनन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जहां सरकारी व निजी क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां संचालित हैं। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) सहित विभिन्न कोयला कंपनियां और ओबरा व डाला क्षेत्र में पत्थर की खदानें स्थित हैं। ऐसे में सर्वेइंग कोर्स करने वाले युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। माइनिंग डिप्लोमा के पूर्व छात्र उज्ज्वल पांडेय, ज्ञानप्रकाश यादव तथा माइनिंग द्वितीय वर्ष के छात्र किशन मिश्रा और प्रशांत दुबे ने बताया कि यदि जिले के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में सर्वेइंग कोर्स शुरू किया जाता है तो स्थानीय युवाओं को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे यहीं रहकर तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। युवाओं ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि सोनभद्र के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में जल्द से जल्द दो वर्षीय सर्वेइंग कोर्स शुरू किया जाए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा का लाभ मिल सके।
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