कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।अम्बेडकरनगर जनपद के विकास खंड जहांगीरगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत शंकरपुर वर्जी में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों और पोर्टल पर दर्ज विवरणों के आधार पर कई ऐसे तथ्य उजागर हुए हैं, जो पूरे प्रकरण को संदिग्ध बनाते हैं।
सबसे पहले, 8 सितंबर 2025 को 1,50,934 रुपये का एक बिल पास किया गया, जिसमें शिवम ईट उद्योग का 36,313 रुपये का बिल भी शामिल था। इस बिल का नंबर 328 दर्शाया गया है। सामान्य वित्तीय नियमों के अनुसार, किसी भी बिल नंबर का उपयोग केवल एक बार ही किया जा सकता है, क्योंकि हर बिल एक विशिष्ट लेनदेन का प्रमाण होता है।
इसके बावजूद, दिसंबर 2025 में पुनः 36,313 रुपये का ईंट से संबंधित बिल दिखाया गया, जिसमें फिर वही बिल नंबर 328 प्रयोग किया गया। यह स्पष्ट संकेत देता है कि एक ही बिल नंबर के आधार पर दो बार भुगतान निकाला गया, जो वित्तीय नियमों का सीधा उल्लंघन है और संभावित रूप से सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
दिसंबर 2025 के मामले में एक और गंभीर तथ्य यह है कि उक्त बिल बिना GST रसीद के दर्शाया गया है। वर्तमान कर व्यवस्था में किसी भी पंजीकृत व्यापारी द्वारा आपूर्ति किए गए माल पर GST लागू होता है और उसका बिल GST नंबर सहित होना अनिवार्य है। जबकि यहां न तो GST का उल्लेख है और न ही वैध टैक्स विवरण, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि या तो फर्जी बिल लगाया गया है या फिर कर नियमों की अनदेखी कर भुगतान किया गया।
और भी चिंताजनक स्थिति जनवरी 2026 में देखने को मिलती है, जहां ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सभी बिल वाउचर के स्थान पर “file does not exist” प्रदर्शित हो रहा है। यह स्थिति तब है जब नियमानुसार प्रत्येक भुगतान से संबंधित बिल, वाउचर और कार्य विवरण पोर्टल पर अपलोड होना अनिवार्य है। इससे यह आशंका बलवती होती है कि जानबूझकर दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए या बाद में हटा दिए गए हैं।
फरवरी 2026 के बिल वाउचर को पासवर्ड से सुरक्षित कर दिया गया है, जिससे आम नागरिक उन्हें देख नहीं सकते। जबकि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल का मूल उद्देश्य ही पारदर्शिता और सार्वजनिक निगरानी है। इस प्रकार पासवर्ड लगाना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि सूचना को छिपाने का प्रयास भी प्रतीत होता है।
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जब ग्रामीणों द्वारा जानकारी मांगी गई, तो संबंधित अधिकारियों ने यह कहकर सूचना देने से इनकार कर दिया कि सभी विवरण ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध हैं। लेकिन वास्तविकता में पोर्टल पर या तो फाइलें उपलब्ध नहीं हैं या उन्हें देखने योग्य नहीं रखा गया है, जो स्पष्ट रूप से सूचना छिपाने की श्रेणी में आता है।
इसके अतिरिक्त, GST व्यवस्था लागू होने के बाद TIN नंबर अमान्य हो चुका है। इसके बावजूद शिवम ईट उद्योग द्वारा बिना GST के कार्य करना और ग्राम पंचायत द्वारा ऐसे भुगतान करना कई सवाल खड़े करता है—क्या यह फर्म पंजीकृत है? यदि नहीं, तो भुगतान कैसे किया गया? और यदि है, तो GST का भुगतान क्यों नहीं दिखाया गया?
इन सभी तथ्यों को एक साथ देखने पर यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय अनियमितता और संभावित भ्रष्टाचार का प्रतीत होता है, जिसमें ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव और संबंधित ईट उद्योग की भूमिका संदेह के घेरे में है।
ग्रामीणों ने जिला अधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के तकनीकी पहलुओं की भी जांच हो, और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों व फर्म के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी धन की सुरक्षा और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।