आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। प्रतिबंधित दोहरा और तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए विभागीय टीम द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है, लेकिन शहर में अवैध दोहरा कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। हाल ही में खरका तिराहे स्थित शीला देवी की दुकान तथा नेवादा क्षेत्र में कमलेश मौर्या पान भंडार पर विभागीय टीम ने विशेष जांच और कार्रवाई की। यह कार्रवाई अवैध रूप से दोहरा और तंबाकू उत्पादों की बिक्री संबंधी शिकायतों के आधार पर की गई।
बताया जा रहा है कि अधिकारियों को लगातार सूचना मिल रही थी कि इन दुकानों समेत आसपास के कई स्थानों पर खुलेआम प्रतिबंधित दोहरा और तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर टीम ने जांच अभियान चलाया। हालांकि कार्रवाई के बाद भी शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि केवल छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोतवाली क्षेत्र सहित शहर के विभिन्न इलाकों में आज भी बिना किसी भय के दोहरा की बिक्री जारी है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर दोहरा बनाने और बड़े स्तर पर इसकी आपूर्ति करने वाले कारोबारियों तक विभागीय टीम की पहुंच क्यों नहीं हो रही है। नागरिकों का मानना है कि यदि निर्माण और सप्लाई नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो तो इस अवैध कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार शहर के शकर मंडी, पानदरीबा, खासनपुर, सिपाह, भंडारी तथा अन्य कई मोहल्लों में दोहरा का निर्माण और बिक्री धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय-समय पर होने वाली कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है, जबकि कारोबार का मूल स्रोत जस का तस बना रहता है।
शहर के बुजुर्ग और सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने दोहरा के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था। उनके कार्यकाल में न केवल दोहरा की बिक्री और निर्माण पर सख्ती की गई, बल्कि इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया। उस समय कार्रवाई का असर इतना व्यापक था कि दोहरा बनाने, बेचने और सेवन करने वालों में भी भय का माहौल बन गया था।
लोगों के अनुसार उस अभियान के दौरान प्रशासन ने जनसहभागिता को भी बढ़ावा दिया था। दोहरा के खिलाफ शिकायत करने वालों को प्रोत्साहित किया जाता था और लगातार निगरानी रखी जाती थी। इसका परिणाम यह हुआ कि शहर में अवैध दोहरा कारोबार काफी हद तक नियंत्रित हो गया था।
हालांकि प्रशासनिक बदलावों के बाद स्थिति फिर से बदलती दिखाई दे रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दोहरा के निर्माण, बिक्री और सेवन की घटनाएं एक बार फिर बढ़ने लगी हैं। शहर की गलियों, मोहल्लों और चौराहों पर आज भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा होती रहती है और लोग प्रशासन से व्यापक तथा स्थायी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जनस्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि तंबाकू और दोहरा जैसे उत्पाद स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे में केवल छिटपुट कार्रवाई के बजाय निर्माण से लेकर बिक्री तक की पूरी श्रृंखला पर प्रभावी निगरानी और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि इस अवैध कारोबार पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जा सके।
