देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर संयोजन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के सरकार के फैसले को जनता के संघर्ष की जीत बताया है। पार्टी ने मांग की है कि उपभोक्ताओं के यहां पहले से लगाए गए स्मार्ट मीटर बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के हटाए जाएं। यह बातें भाकपा उत्तर प्रदेश के राज्य कार्यकारिणी सदस्य व सोनभद्र जिला सचिव आर के शर्मा ने गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रीपेड स्मार्ट मीटर
कनेक्शन की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय जनता के व्यापक विरोध का परिणाम है। भाकपा नेता ने आरोप लगाया कि बिजली के निजीकरण के उद्देश्य से सरकारें कानूनों में बदलाव कर रही हैं और ऐसी नीतियां लागू की जाती हैं, जिससे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़े। उन्होंने कहा कि भाकपा समेत विभिन्न संगठनों के नेतृत्व में प्रदेशभर में प्रीपेड स्मार्ट मीटर के खिलाफ जोरदार आंदोलन चलाया गया, जिसके चलते सरकार को अपना कदम पीछे खींचना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार पहले जनविरोधी नीतियां जल्दबाजी में लागू करती है और जब जनता विरोध करती है तो चुनावी दबाव में उन्हें वापस लेने को मजबूर हो जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता क्यों लागू की गई थी, इसका सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। आर के शर्मा ने मांग करते हुए कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में अभी तक डिजिटल नेटवर्क की समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्मार्ट मीटर लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि लोगों के यहां लगाए गए स्मार्ट मीटर हटाकर पूर्व की तरह विभागीय मीटर व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता की नाराजगी के कारण सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा है। आने वाले पंचायत चुनाव और 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार पर दबाव बना। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जनता एकजुट रहे तो सरकार की जनविरोधी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक नीतियों को बदला जा सकता है।
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