देवल संवाददाता, मऊ। सहायक निदेशक मत्स्य विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि जनपद में वर्षा ऋतु के दौरान मछलियों के प्रजनन एवं संरक्षण को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा नदियों एवं प्राकृतिक जल स्रोतों में मत्स्य आखेट तथा मत्स्य बीज पकड़ने पर प्रतिबंध लागू किया गया है। यह प्रतिबंध उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम-1948 एवं उत्तर प्रदेश मत्स्य (विकास एवं नियंत्रण) नियमावली-1954 के प्रावधानों के अंतर्गत लगाया गया है।जारी अधिसूचना के अनुसार जनपद में प्रवाहित घाघरा नदी एवं उससे संबंधित नालों तथा अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में दिनांक 01 जून से 30 जुलाई तक मत्स्य शिकारवाही पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। इसके अतिरिक्त दिनांक 15 जुलाई से 31 अगस्त तक मत्स्य फ्राई एवं फिंगरलिंग आकार (02 से 10 सेमी.) के मत्स्य बीज पकड़ने, नष्ट करने एवं विक्रय करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।प्रशासन द्वारा बताया गया कि वर्षा ऋतु में रोहू,कतला,नैन सहित विभिन्न प्रजातियों की मछलियाँ प्रजनन करती हैं। ऐसे में उनके संरक्षण एवं मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रतिबंध लगाया गया है।प्रतिबंध अवधि के दौरान नदियों एवं प्राकृतिक जल स्रोतों में मत्स्य आखेट की निगरानी एवं चेकिंग हेतु मत्स्य विभाग,राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों को अधिकृत किया गया है। संबंधित अधिकारी नियमित निरीक्षण एवं कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि प्रतिबंध अवधि में मत्स्य आखेट अथवा मत्स्य बीज के अवैध शिकार एवं विक्रय से दूर रहें। नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम-1948 के तहत विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
