आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। जनपद में निजी विद्यालयों की बढ़ती मनमानी, शैक्षिक अनियमितताओं और छात्रों-अभिभावकों के आर्थिक शोषण के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) जौनपुर इकाई ने सोमवार को अतिरिक्त नगर मजिस्ट्रेट मंजूलता के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन को 8 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कई निजी विद्यालय शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय का माध्यम बना चुके हैं। विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने, निर्धारित दुकानों से ड्रेस लेने तथा विभिन्न शुल्कों के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। परिषद ने इसे छात्रों और अभिभावकों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से विद्यालयों द्वारा हर वर्ष पुनः प्रवेश शुल्क के नाम पर की जा रही अवैध वसूली, बिना अनुमति फीस वृद्धि तथा मनमाने नियम लागू करने का मुद्दा उठाया गया। अभाविप ने मांग की कि निजी स्कूलों की फीस संरचना पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
परिषद कार्यकर्ताओं ने आरटीई अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत आरक्षण का कड़ाई से पालन कराने की मांग भी की। साथ ही बिना मान्यता संचालित विद्यालयों की जांच कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की बात कही। कार्यकर्ताओं का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम और समान शिक्षा व्यवस्था लागू करना समय की आवश्यकता है।
अभाविप पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शीघ्र ही प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो विद्यार्थी परिषद छात्र हितों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन चलाने को बाध्य होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि छात्रों और अभिभावकों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस दौरान प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हर्षवर्धन चौरसिया, पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नमन सिंह, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य हर्ष सिंह सहित एकांश, अक्षत, नितेश, प्रिंस, गौरव, रूद्र, नात्सु और बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
