आमिर, देवल ब्यूरो ,शाहगंज, जौनपुर। जिले के बहुचर्चित 6 वर्षीय अभिषेक अपहरण एवं हत्याकांड में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रताप यादव की अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी ट्यूटर शिवम श्रीवास्तव और उसके साथी आकाश शाह को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद के साथ कुल 4.50 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि जुर्माने की आधी धनराशि पीड़ित परिवार को प्रदान की जाए।
यह हृदयविदारक घटना 2 जनवरी 2021 की है। शाहगंज क्षेत्र की बैंकर्स कॉलोनी (गौशाला) निवासी दीपचंद्र यादव का छह वर्षीय पुत्र अभिषेक कोचिंग जाने के लिए घर से निकला था, लेकिन रास्ते में अचानक लापता हो गया। बच्चे के गायब होने के कुछ ही समय बाद उसके पिता के मोबाइल फोन पर सात लाख रुपये की फिरौती मांगने वाला संदेश आया। संदेश में चेतावनी दी गई थी कि यदि पुलिस को सूचना दी गई तो बच्चे की हत्या कर दी जाएगी।
मामले की जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके बाद पता चला कि अभिषेक को उसके ही ट्यूटर शिवम श्रीवास्तव और उसके साथी आकाश शाह ने बाइक से अपने साथ ले जाया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फिरौती की रकम हासिल करने की नीयत से बच्चे का अपहरण किया था।
पुलिस के अनुसार, फिरौती की रकम न मिलने पर दोनों आरोपियों ने मासूम अभिषेक की मफलर से गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को जमुनिया गांव स्थित आईटीआई की पानी टंकी के पास फेंक दिया गया था।
घटना के खुलासे के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने मासूम का शव, स्कूल बैग, किताबें, चप्पल, हत्या में प्रयुक्त मफलर, बोरी, रस्सी तथा घटना में इस्तेमाल की गई बाइक बरामद की थी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, बरामदगी और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत में मजबूत पैरवी की। सभी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
अपने फैसले में न्यायालय ने इस घटना को “क्रूरतम और जघन्य अपराध” बताते हुए कहा कि धन के लालच में एक मासूम बच्चे का अपहरण कर उसकी निर्मम हत्या करना समाज की संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी न्याय के हित में नहीं होगी।
फैसला सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने न्यायालय के निर्णय पर संतोष व्यक्त किया। हालांकि परिवार का कहना है कि न्याय मिलने के बावजूद उनके मासूम बेटे की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। चार वर्ष बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र को उस दर्दनाक घटना की याद दिला दी, जिसने जनमानस को झकझोर कर रख दिया था।
