आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। जनपद में फाइलेरिया (हाथीपांव) रोग की रोकथाम और मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार के नेतृत्व में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में फाइलेरिया रोगियों के रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता रोकथाम (एमएमडीपी) विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र सिंह ने की।
कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव और डॉ. सिद्धार्थ दत्ता ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से फाइलेरिया रोग के कारण, लक्षण, बचाव, जांच और उपचार की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाला संक्रामक रोग है, जिसका प्रमुख परजीवी वुचरेरिया बैंक्रॉफ्टी होता है। इस बीमारी में हाथ-पैर, स्तन और अंडकोष में सूजन के साथ पेशाब में सफेद पानी आने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
विशेषज्ञों ने मरीजों को साफ-सफाई, प्रभावित अंगों की नियमित धुलाई, व्यायाम और स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के महत्व के बारे में भी जागरूक किया। डॉ. मंजीत कुमार ने प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और बीमारी से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए।
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने बताया कि जनपद में वर्तमान समय में 5,270 फाइलेरिया मरीज चिन्हित किए गए हैं। इन सभी मरीजों को रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता रोकथाम के तहत प्रशिक्षण देकर एमएमडीपी किट उपलब्ध कराई जा रही है। वर्ष 2025 में पंजीकृत सभी मरीजों को किट वितरित की जा चुकी है, जबकि वर्ष 2026 में भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
कार्यशाला के दौरान पांच फाइलेरिया मरीजों को प्रशिक्षण देकर एमएमडीपी किट वितरित की गई। स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की कि घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें, जलभराव न होने दें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरी बांह के कपड़े पहनें। साथ ही यदि किसी व्यक्ति में फाइलेरिया के लक्षण दिखाई दें तो उसे तत्काल सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या फाइलेरिया नियंत्रण इकाई में जांच और उपचार के लिए भेजें।
कार्यशाला में विभिन्न ब्लॉकों के अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, बीसीपीएम, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सहित डब्ल्यूएचओ, पाथ और पीसीआई संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं मलेरिया-फाइलेरिया विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
