होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से ईरान को हर रोज $435 मिलियन के नुकसान होने का अनुमान है। जैसे-जैसे तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कई अटकलें लगाई जा रही है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी से ईरान को हर दिन $435 मिलियन (₹4,081 करोड़ रुपये) तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। मालूम हो कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि, सोमवार से होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी शुरू हो जाएगी। इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ईरान से आने वाले या ईरान जाने वाले किसी भी जहाज को नहीं जाने दिया जाएगा।
कई कारणों पर निर्भर है नुकसान का आंकड़ा
वहीं, विशेषज्ञों की माने तो ईरान का संभावित नुकसान कई अज्ञात कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें यह भी शामिल है कि US नाकेबंदी कितनी अभेद्य साबित होती है। इसके साथ ही तेहरान किस हद तक होर्मुज जलक्षेत्र के बाहर, अपना तेल निर्यात कर पाता है। इसके अलावा नाकेबंदी के पहले भारी मात्रा में ईरानी तेल पहले से ही समुद्र में मौजूद है। जानकारी के अनुसार, लगभग 154 मिलियन बैरल तेल समुद्र में तैर रहा है।
ट्रेजरी विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने WSJ को बताया, "ईरान के बंदरगाहों की US नाकेबंदी से ईरान को हर दिन लगभग $435 मिलियन का आर्थिक नुकसान होगा।" अनुमानित नुकसान में निर्यात में हुई लगभग $276 मिलियन की कमी शामिल है, जिसमें मुख्य रूप से कच्चा तेल और पेट्रोकेमिकल्स शामिल हैं। लेकिन मालेकी के अनुमान इस बात पर आधारित हैं कि ईरान हर दिन 1.5 मिलियन बैरल तेल का निर्यात कर रहा है, जिसकी कीमत युद्धकाल के हिसाब से लगभग $87 प्रति बैरल है, और यह भी माना गया है कि 90 प्रतिशत से अधिक तेल फारस की खाड़ी के अंदर स्थित खर्ग द्वीप से होकर गुजरता है।
होर्मुज स्ट्रेट में ट्रंप की नाकेबंदी कैसे सफल होगी?
मध्य पूर्व में इस वक्त अमेरिका के 16 युद्धपोत तैनात हैं, लेकिन AP की एक रिपोर्ट के अनुसार, फारसी की खाड़ी में कोई युद्धपोत मौजूद नहीं है। यह वही जलक्षेत्र है जो ईरान की अधिकांश तटरेखा बनाता है। यहां तक कैसे पहुंचा जाएगा और इन उपायों को कैसे लागू किया जाएगा, इस पर अभी काम चल रहा है।
वहीं, अमेरिकी सेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़ी संख्या में जहाजों की आवाजाही होगी, जो आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुज़रती है। लंदन स्थित रक्षा और सुरक्षा थिंक टैंक 'रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट' में नौसेना शक्ति विशेषज्ञ सिद्धार्थ कौशल ने कहा कि इन प्रतिबंधों को लागू करने के लिए काफी संख्या में जहाजों की जरूरत पड़ सकती है। कौशल ने आगे कहा, "बहुत कुछ नाकेबंदी के शुरुआती दिनों पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी सेना कितने जहाजों को जब्त कर पाती है, और कितने जहाज घेराबंदी से बचकर निकलने में सफल होते हैं।
बता दें कि, ट्रंप ने नाकेबंदी लगाने की धमकी तब दी, जब पिछले सप्ताह संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाने के लिए हुई बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। वहीं, ईरान ने युद्ध के दौरान सबसे पहले इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से लगभग सभी टैंकरों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी, और केवल उन्हीं जहाजों को गुजरने की अनुमति दी थी; जिन्हें वह दोस्त मानता था और उनसे भारी शुल्क वसूल करता था।
