कर्नाटक सरकार सभी स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ कराने पर विचार कर रही है। इसमें बेंगलुरु के नगर निकाय चुनाव भी शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने सोमवार को इस मामले में बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इससे स्थानीय स्तर पर युवाओं और नई पीढ़ी को नेतृत्व मिल सके। यह फैसला लंबे समय से लंबित पड़े स्थानीय चुनावों को एक साथ निपटाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
बेंगलुरु में ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के तहत पांच नगर निगमों के 369 वार्ड बनाए गए हैं। इन चुनावों के लिए सोमवार को ही ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है।
क्या है सरकार की मंशा?
शिवकुमार ने साफ किया कि जिला पंचायत और तालुक पंचायत चुनाव कराने का फैसला हो चुका है। आरक्षण से जुड़े मुद्दों को मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने हल करने की बात कही है।
उन्होंने कहा, "कई लोगों ने सुझाव दिया है कि ग्राम पंचायत चुनाव भी पार्टी सिंबल पर हों, लेकिन इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सभी चुनाव एक साथ कराने पर विचार चल रहा है।"
बैलेट पेपर से वोटिंग?
जब उनसे स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर इस्तेमाल करने की बात पूछी गई, तो शिवकुमार ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है। लेकिन यह मामला राज्य चुनाव आयोग के दायरे में आता है।
उन्होंने जोर देकर कहा, "बैलेट पेपर इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है। चुनाव का तरीका से ज्यादा अहम है कि वोटिंग हो।"
शिवकुमार ने साफ किया कि सरकार चुनाव आयोग के कामकाज में दखल नहीं देगी। राज्य चुनाव आयोग सरकार के नियंत्रण में नहीं है और यह अपने ढंग से फैसले लेगा।
केंद्र पर भरोसा की कमी?
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद शिवकुमार ने कहा कि अगर किसी वोटर का नाम छूट गया है तो उसे दूसरा मौका मिलना चाहिए। उनका अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की व्यवस्था पहले से कर ली गई है। उन्होंने कहा, "हम अधिकारियों के काम में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। चुनाव आयोग मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर काम करेगा।"
जब पूछा गया कि क्या बैलेट पेपर का इस्तेमाल केंद्र चुनाव आयोग पर भरोसे की कमी के कारण है, तो शिवकुमार ने कहा, "चुनाव कौन कराता है? चुनाव आयोग कराता है। राज्य चुनाव आयोग हमारे सरकार के अधीन नहीं है। यह खुद तय करेगा कि क्या करना है।"
दावोस यात्रा रद पर बीजेपी का तंज
बीजेपी नेताओं ने उन पर दावोस यात्रा राजनीतिक कारणों से रद करने का आरोप लगाया। शिवकुमार ने मजाकिया अंदाज में कहा, "उनकी बात में कुछ सचाई है। मैं गलत नहीं कहूंगा। यह सवाल कल सुबह फिर पूछना।"