महर्षि वाल्मीकि जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर मजदूरों के अधिकार, सामाजिक न्याय और संगठन विस्तार पर हुआ मंथन
देवल, ब्यूरो चीफ,चुर्क (सोनभद्र)। असंगठित मजदूर मोर्चा, उत्तर प्रदेश की दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय चिंतन एवं समीक्षा बैठक सोमवार को चुर्क स्थित मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश गौतम के आवास पर संपन्न हुई। बैठक में असंगठित मजदूरों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और मानसिक गुलामी से मुक्ति, श्रमिक अधिकारों, ई-श्रम कार्ड अभियान तथा संगठन के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बैठक की अध्यक्षता मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार ने की।
दो दिनों तक चले मंथन में पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और चंदौली के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली और बागपत में संगठन की स्थिति की समीक्षा की गई। सफाई कर्मियों, रसोइयों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ईंट-भट्ठा एवं खदान मजदूरों की समस्याओं तथा श्रमिक कल्याण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कराने के मुद्दे उठाए गए।
हर गांव में मजदूरों की टीम बनाने का निर्णय
राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार ने कहा कि देश में असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों के सामने पहचान, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने खदानों में सिलिकोसिस जैसी बीमारियों से प्रभावित मजदूरों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मजदूरों को उनके अधिकार दिलाने के लिए संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करना होगा। उन्होंने हर गांव में 10 मजदूरों की टीम गठित करने का आह्वान किया और ई-श्रम कार्ड, मनरेगा कार्ड सहित श्रमिक कल्याण योजनाओं से जुड़े दस्तावेजों को मजदूरों के अधिकारों का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लेखनी समाज में परिवर्तन का माध्यम है और स्वच्छता कर्मियों का योगदान सम्मान के योग्य है। इसके बावजूद सफाई कर्मियों को उचित वेतन और सम्मान नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
मजदूरों के मानदेय और सम्मान का मुद्दा उठा
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश गौतम ने आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दलों की रैलियों में रसोइया, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं सहित अन्य कर्मियों को बुलाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं से जुड़े कर्मियों को किसी राजनीतिक दल के दबाव में नहीं, बल्कि सम्मान और स्वतंत्रता के साथ काम करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आम आदमी पार्टी की ओर से सत्ता में आने पर संबंधित कर्मियों का मानदेय दोगुना करने और नौकरी पक्की करने के संकल्प का भी उल्लेख किया।
शामली के जिलाध्यक्ष सतेंद्र झाल ने दलितों और पिछड़े वर्गों के शिक्षा एवं आरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए। वहीं सहारनपुर की मंडल प्रभारी रश्मि अंबेडकर ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और रसोइया प्रदेश की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कर्मियों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और कथित दबाव की घटनाओं का रिकॉर्ड रखने की अपील की।
बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों द्वारा सीमित संसाधनों में संगठन को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की गई।
सक्रिय पदाधिकारियों को किया सम्मानित
बैठक के समापन पर राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सक्रिय पदाधिकारियों को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाओं वाले स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में रश्मि अंबेडकर, मंडल प्रभारी सहारनपुर; सतेंद्र झाल, जिलाध्यक्ष शामली; सुकराम पाल, जिलाध्यक्ष बागपत; रोहित जाटव, जिला मीडिया प्रभारी मुजफ्फरनगर; उर्वशी अंबेडकर, जिलाध्यक्ष मेरठ; वंशिका अंबेडकर, ब्लॉक अध्यक्ष ऊन तथा कुलदीप कुड़ाना, मंडल अध्यक्ष सहारनपुर सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
प्रतीकात्मक राजनीति पर सवाल
बैठक में दलित समाज को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतीकात्मक राजनीति पर सवाल उठाते हुए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया। मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और ‘जय भीम’ के नारे के साथ-साथ दलित समाज को शिक्षा, रोजगार, आरक्षण, भूमि और सम्मान से जुड़े वास्तविक अधिकार भी मिलने चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नीतियों और योजनाओं के माध्यम से वंचित वर्गों के जीवन में वास्तविक बदलाव दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दलित और वंचित समाज की भागीदारी तथा अधिकारों को सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।
बैठक के अंत में कुलदीप कुड़ाना, रोहित जाटव, सुकराम पाल, वंशिका अंबेडकर, उर्वशी अंबेडकर, राकेश राम, निखिल कुमार सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने गुलामी के विभिन्न स्वरूपों से मुक्ति और सामाजिक समानता के लिए संघर्ष करने की शपथ ली।
कार्यक्रम का समापन ‘जय भीम, जय वाल्मीकि भगवान और जय संविधान’ के उद्घोष के साथ हुआ।
